बहन का लौड़ा -66

(Bahan Ka Lauda-66)

This story is part of a series:

अभी तक आपने पढ़ा..

मीरा- राधे प्लीज़ चुप रहो.. नीरज को कुछ नहीं होगा.. वो उसको हॉस्पिटल ले गए हैं.. अब चलो यहाँ से.. प्लीज़ ऐसी कोई भी बात मुँह से मत निकालो.. कोई सुन लेगा तो मुसीबत हो जाएगी। तुमने कुछ नहीं किया.. यह बस एक हादसा हुआ है.. ओके.. प्लीज़ चलो यहाँ से..
बड़ी मुश्किल से मीरा ने राधे को समझाया और वहाँ से घर ले गई।

राधे- मीरा हमें उसके पास जाना चाहिए.. वो ठीक तो होगा ना?
मीरा- नहीं.. हमारा वहाँ जाना ठीक नहीं होगा.. समझो बात को.. पापा को पता चल जाएगा। मैं किसी तरह पता लगा लूँगी। मगर प्लीज़ तब तक तुम घर पर ही रुकना.. ओके..
राधे- नहीं मीरा.. अगर उसको कुछ हो गया.. तो मैं कभी अपने आपको माफ़ नहीं कर पाऊँगा. वो कैसा भी हो.. मेरा दोस्त था.. प्लीज़ चलो..
मीरा- मेरा विश्वास करो.. उसको कुछ नहीं होगा। मैं जाकर आती हूँ ना.. प्लीज़ तब तक तुम बस यहीं रहो।
मीरा वहाँ से वापस निकल गई और राधे एकदम सुन्न सा होकर वहीं बैठ गया।

दोस्तो, मुझे पता है कुछ ज़्यादा ही हो गया.. मगर अब कहानी के अंत का समय है.. जैसे मोमबत्ती बुझने के पहले ज़्यादा लौ देती है.. वैसे ही ये कहानी भी अपने अंत के समय ज़्यादा उत्तेजित करेगी।

अब आगे..

उधर रोमा और टीना के दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं.. क्योंकि शाम हो चुकी थी और अब नीरज के पास जाने का समय हो गया था।
टीना- यार मेरा तो दिल बड़ा घबरा रहा है.. अब क्या होगा?
रोमा- अरे कुछ नहीं होगा.. रुक मैं उसको फ़ोन करती हूँ।

रोमा ने नीरज को फ़ोन लगाया.. मगर उसका फ़ोन बन्द था। कई बार रोमा ने ट्राइ किया.. मगर कोई फायदा नहीं हुआ।
टीना- अरे क्या हुआ?
रोमा- यार कितनी बार ट्राइ किया.. फ़ोन बन्द है उसका..
टीना- चलो जान बची.. पड़ा होगा कहीं पीकर.. तू अब फ़ोन मत कर।
रोमा- यार कहीं उसने वीडियो नेट पर डाल दिया तो?

टीना- अरे ऐसे कैसे डाल देगा.. उसका फ़ोन बन्द है.. इसमें हमारी क्या ग़लती है.. और वैसे भी वो ऐसी ग़लती नहीं करेगा। तुमसे उसको बड़ा फायदा है.. तुमको वो ऐसे हाथ से जाने नहीं देगा। चल आज तो बच गए.. आगे का बाद में सोच लेंगे।

रोमा वहाँ से अपने घर चली जाती है और बस नीरज के बारे में ही सोचती रहती है। नीरज के व्यवहार से उसके दिल को बड़ा धकका लगा था। मगर टीना की इज़्ज़त बचाने के लिए उसने अपना दिल मजबूत किया हुआ था।

दोस्तो, अब यहाँ भी कुछ नहीं है.. उधर मीरा वापस आ गई है.. तो देखो वहाँ क्या हुआ होगा।

राधे कमरे में बैठा हुआ था.. मीरा को देख कर वो खड़ा हो गया। वो कुछ बोलता.. उसके पहले मीरा बोल पड़ी।

मीरा- अरे मेरे आशिक.. ऐसे मुँह लटकाए क्यों बैठे हो.. नीरज ठीक है ओके.. अब तुम टेन्शन मत लो.. मैं खुद उससे मिलकर आई हूँ। उसने माफी भी माँगी और तुम्हें भी सॉरी बोला है। अब उसको अपनी ग़लती का अहसास हो गया है.. वो हमें अब दोबारा परेशान नहीं करेगा।
राधे- ओह्ह.. थैंक्स.. भगवान ने मेरी सुन ली.. नहीं तो में अपने आपको कभी माफ़ नहीं कर पाता.. मुझे उससे मिलना है!
मीरा- अरे नहीं.. उसके कुछ दोस्त वहाँ आ गए थे.. डॉक्टर ने कहा है कि इसको मुंबई ले जाओ.. तो अच्छा रहेगा। बस उसके सर पर चोट आई है और पैर टूटा है.. वो ठीक है यार.. बाद में कभी आराम से मिल लेना।
राधे- ओके मीरा अच्छा हुआ कि उसको अपनी ग़लती का अहसास हो गया।

राधे ख़ुशी के मारे मीरा से लिपट गया और काफ़ी देर तक दोनों वैसे ही लिपटे खड़े रहे।

दोस्तो, अब आज की रात सेक्स होगा.. यह तो भूल ही जाओ.. कहानी थोड़ा गमगीन अवस्था में चल रही है.. तो चलो रात को फास्ट फॉरवर्ड करो और सीधे सुबह का सूरज निकलते हुए देखो।

दोस्तो, सुबह का सूरज तो निकला.. मगर इस सुबह ने रोमा के दिल की धड़कनों को बढ़ा दिया।
रोमा अभी भी टेन्शन में थी कि नीरज ने फ़ोन क्यों नहीं किया और अभी तक भी उसका फ़ोन बन्द है। कहीं ऐसा ना हो वो स्कूल जाए और वहाँ पहले ही सबके पास उसका एमएमएस पहुँच गया हो.. बस इसी उलझन में वो तैयार हुई।

उसकी माँ ने भी उसको कहा- आज तेरा चेहरा क्यों उतरा हुआ है?
मगर उसने बुखार का बहाना बना दिया। वो चाह रही थी कि माँ उसको स्कूल जाने से रोक दे.. मगर ऐसा हुआ नहीं और वो बेचारी बेमन से स्कूल के लिए निकल गई।

उधर रोज का आलम था.. ममता आई अपने काम में लग गई और मीरा भी स्कूल चली गई।
ममता- क्या हुआ साहेब जी.. आज बड़े उदास लग रहे हो.. रात को बीबी जी से झगड़ा हुआ क्या?
राधे- अरे नहीं.. ऐसा कुछ नहीं है.. आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है.. तो बस मूड खराब है.. तू अपना काम कर.. मुझे परेशान ना करना.. मैं थोड़ा आराम करना चाहता हूँ।

ममता को लगा कि आज तो उसको लौड़े का स्वाद नहीं मिलेगा.. तो उसने भी मन मार कर अपनी चूत को समझा दिया और काम पर लग गई।

उधर टीना और रोमा स्कूल में बस इसी बात पर बात कर रही थीं कि आख़िर नीरज कहाँ गायब हो गया। मगर उनके लिए नीरज एक अनसुलझी पहेली की तरह हो गया था।

स्कूल की छुट्टी हो गई.. वो घर आ गई मगर नीरज अब भी गायब था। वो बस सोच-सोच कर परेशान हो रही थी।

दोस्तो, बस इसी तरह दिन निकलते रहे और रोमा की सोच बस सोच बनकर ही रह गई.. क्योंकि नीरज अब उसकी सोच की गहराइयों में कहीं खो गया था।

उसका कुछ अता-पता ही नहीं था.. टीना ने उसको समझाया कि शायद उसको कोई और मिल गई होगी या उसको अपनी ग़लती का अहसास हो गया होगा.. जो वो चुपचाप यहाँ से चला गया।
रोमा के दिल में भी ऐसा ही कुछ विचार चल रहा था। अब वो भी नीरज को भूलने लगी थी। उसका डर भी अब कम हो गया था..
वो कहते है ना कि वक़्त हर जख्म को भर देता है.. जो घाव नीरज ने उसको दिए हैं वो भी कभी ना कभी भर ही जाएँगे।

हाँ.. एक बात है रोमा को कभी-कभी सेक्स की इच्छा होती है.. मगर जब उसको नीरज का ख्याल आता है तो उसकी आँखें भर आती हैं और सेक्स का ख्याल दिल से निकल जाता है।

दोस्तो, अगर आप लड़के हो तो प्लीज़ किसी कच्ची कली के चक्कर में किसी की लाइफ बर्बाद मत करना। सेक्स भगवान का दिया हुआ एक अ नमोल तोहफा है। सेक्स करो.. मगर ज़बरदस्ती या किसी को मजबूर करके नहीं.. और अगर इंसान हो तो किसी एक
के साथ वफ़ा करो.. अलग-अलग के साथ तो जानवर करते हैं। लड़कियां भी ये जान लें कि प्यार अँधा होता है.. मगर पागल नहीं.. दिमाग़ इस्तेमाल करें.. अपने प्रेमी को खुश करने के लिए ऐसा कदम ना उठाएं कि सारी जिंदगी आपको पछताना पड़े.. ओके..।

आज कुछ ज़्यादा ही मैंने उपदेश दे दिया सॉरी.. अब आगे क्या हुआ वो देखते हैं।

दोस्तों इसी तरह कुछ और दिन निकल गए। अब सब नॉर्मल हो गए थे.. तो चलो नये दिन की शुरूआत ख़ुशी के साथ करते हैं।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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