दोपहर में पूजा का मजा-2

This story is part of a series:

फिर हम रोज बात करने लगे और कई बार फोन सेक्स भी किया। बस अब मैं उसे चोदने का मौका देख रहा था। क्यूँकि पूजा की चूत भी चुदने को बेताब थी। वो फोन पर कहती तुम्हें देखने का मन कर रहा है तो मैं कभी उसके स्कूल में कभी घर की गली में चक्कर लगा आता।

एक दिन उसका फोन आया कि राज तुम्हें देखने का मन कर रहा है, प्लीज आ जाओ।

मैं बोला- ठीक है आता हूँ।

दोपहर का समय था, मैं बाइक लेकर उसके गाँव पहुँच गया। पूजा का फोन आया, बोली- जानू कहाँ हो?

“जान, आपके गाँव में ही हूँ।”

“जानू, अभी मत आना।”

“क्यूँ?”

“जानू, मम्मी खेतों पर जा रही है और भाभी पड़ोस में ! फिर घर ही आ जाना।”

मैं बोला- पागल हो गई हो? मरवाओगी ! कोई आ गया तो?”

“डर गये ना? वैसे कहते हो जानू पण्डित का हूँ, डर नहीं लगता और तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ।”

मेरी तो फट गई थी पर अब इज्जत पर बन आई।

मैं बोला- ठीक है !

और फोन रख दिया।

पूजा का दुबारा फोन आया, बोली- जानू, अब आ जाओ।

मैं बोला- ठीक है।

बाइक खड़ी की और घर की तरफ चल दिया। मेरी हालत तो खराब थी ऊपर से गर्मी। मैं घर मैं अन्दर गया तो पूजा गेट के पास ही खड़ी थी। वो मुझे देखकर मुस्कुराई,

बोली- आइए।

पूजा को देखकर मेरी साँस में साँस आई। उसे देखा तो देखता रह ही रह गया। होंटों पर हल्की सी लिपिस्टिक की लाली। पूजा ने सफेद रँग का पतला सा कमीज और सलवार पहन रखा था। सूट के गले पर कढ़ाई थी और चूचियाँ दिख रही थी। कमीज-सलवार से ब्रा और पैन्टी के हिस्से को छोड़ कर पूरा शरीर साफ दिख रहा था। पूजा ने काले रंग की पैन्टी और ब्रा पहन रखी थी और खुले बाल कयामत लग रहे थे। शायद पूजा ने ये कपड़े अभी पहने थे। जो भी हो मस्त और हॉट लग रही थी।

पूजा मुस्कराते हुए बोली- क्या हुआ? अब यहीं खड़े खड़े देखते रहोगे?

मैं बोला- देखूँ भी नहीं? इतनी सेक्सी लग रही हो।

पूजा बोली- पहले अन्दर तो आओ, खूब देख लेना मना कौन कर रहा है।

कहकर चूतड़ मटकाती मेरे आगे आगे चल दी। मैं उसकी गाण्ड देखते हुए पीछे पीछे चल दिया। मेरा लण्ड खड़ा हो गया। वो छत पर बने कमरे में ले गई और सोफा की तरफ इशारा करके बैठने को बोली।

पूजा ने पँखा चलाकर मुझे पानी दिया और तौलिया लेकर मेरा पसीना पौंछने लगी।

वो बोली- जानू क्या पियोगे?

मैं बोला- मौसमी का जूस !

“धत् ! बेशर्म !”

“अच्छा !”

मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी गोद में लिटा लिया। उसके बदन की महक ने मदहोश कर दिया। मैंने उसके गालों पर चूमा और बोला- सेबों को खा जाऊँ?

“राज, क्या कर रहे हो? मुझे शर्म आ रही है।”

उसका मुँह शर्म से लाल हो गया। जिससे उसकी सुन्दरता और बढ़ गई।

मैं बोला- अब शर्म आ रही है? फोन पर तो जाने क्या-क्या कहती हो।

“फोन पर अलग बात है।”

मैं बोला- अभी तुम्हारी शर्म दूर किये देता हूँ !

और उसके होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा। पूजा ने मस्ती में आँखे बन्द कर ली और मेरा साथ देने लगी। मैं एक हाथ से उसकी चूची दबाने लगा। नीचे मेरा लण्ड उसकी कमर में छेद करने को तैयार था। फिर मैंने अपना हाथ उसके कमीज के अन्दर डाल दिया और एक एक करके दोनों चूचियों को मसलने लगा।

पूजा कसमसा रही थी। उसके होंटों को छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा था मेरा। मैं कसकर उसके होंटों को चूस रहा था और चूचियों को मसल रहा था। फिर मैं अलग हुआ तो उसकी लिपस्टिक मेरे होंटों पर आ गई और उसके होंट चूसने से लाल हो गये। उसकी आँखे वैसे ही नशीली थी और ऊपर से सेक्स का नशा। कुल मिलाकर वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि अभी चोद दूँ।

पूजा बोली- जानू, थोड़ा धीरे दबाओ, दर्द हो रहा है।

मैंने चूचियों को और तेज मसल दिया जिससे वो सिसिया उठी- ओ राज सी ई ई…धीरे !

अब मेरा लण्ड नीचे दब कर परेशान था। मैंने पूजा को खड़ा किया और उसका कमीज उतारने लगा। वो बनावटी मना कर रही थी। मैंने कमीज उतार ही दिया।

काली ब्रा में गोरी-गोरी चूचियाँ !

क्या बताऊँ !

और वाह चूची पर छोटा सा तिल मेरी जान ही ले गया। मैंने ब्रा भी अलग कर दी, होंट और गर्दन पर चूमा और चूचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा।

मैं बोला- मौसमियों में तो बहुत रस है।

पूजा कुछ नहीं बोली, बस आँखें बन्द करके सिसकार रही थी और बीच-बीच में मुझे चूम कर रही थी। मैंने अपनी ज़िप खोलकर लण्ड बाहर निकाल लिया और उसकी जांघों के बीच घुसा दिया।

पूजा ने आँखें खोली और मुँह पर हाथ रखकर बोली- राज, यह क्या? हाय इतना बड़ा !

मैंने उसका हाथ लिया और लण्ड पर रख दिया। उसने दो उंगलियों से पकड़ा और आगे-पीछे करने लगी।

मैं बोला- जान, पूरी मुठ्ठी में पकड़कर करो।

उसके मुलायम हाथों में आकर लण्ड और जोश में आ गया। मैंने उसका नाड़ा पकड़ा और झटका मारा तो वो खुलने की जगह टूट गया और सलवार घुटनों तक आ गई। उसने पैर भींच लिये।मैंने उसे सोफ़े पर बिठाया और उसकी सलवार और पैन्टी उतार दी।

मैं सोफ़े से नीचे बैठ गया और उसके दोनों पैर चौड़े किये। अब उसकी चूत मेरे सामने थी। पूजा की चूत पर काले रेशम जैसे बाल थे। जिनके बीच चूत मस्त लग रही थी। चूत लाल और उससे थोड़ा पानी निकल रहा था। मैंने उसके उभरे भाग पर हाथ रखा तो पूजा ने दोनों पैर भींच लिए और उसके मुँह से आह निकल गई- सी ई इ. .

मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया तो उसके पैर खुद अलग हो गये। मैंने धीरे से चूत की कली को मसल दिया।

पूजा मचल उठी, बोली- राज…ज !

मैंने चूत की फाकों को अलग किया और छेद वाले गुलावी हिस्से पर जीभ रखकर हिलाने लगा। चूत की खुशबू और पानी से मुझे नशा सा हो गया। मैं चूत में जीभ फिराता रहा। लगभग 7-8 मिनट बाद पूजा ने मेरा सिर चूत पर दबा दिया और पैर भींच लिए, उसकी सांस रुक सी गई, चूत से पानी निकलने लगा।

मेरा मुँह चूत के पानी से भीग गया।

मैं उठा, उसके होंटों पर चुम्बन किया और चूचियों को दबाने लगा।

पूजा ने चाट कर मेरे होंटों पर लगा चूत का पानी साफ कर दिया।

अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था, मैंने खड़े होकर पैंट, अण्डरवीयर दोनों उतार दी।

पूजा ने मेरा लण्ड पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगी जैसे वो मुझसे कह रही हो- राज, अब नहीं सहन हो रहा ! डाल दो अपना लण्ड मेरी चूत में।

मैंने उसका सिर पकड़ा और लण्ड उसके रसीले होंटों से लगा दिया। पूजा ने लण्ड पर चुम्बन किया और मुँह में ले लिया। मैं उसके दोनों तरफ पैर करके सोफ़े पर खड़ा हो गया और लण्ड को अन्दर-बाहर करने लगा। उसके मुँह की गर्मी से लण्ड और फ़ूल गया। जब लण्ड उसके गले तक जाता तो उसकी साँस रुक जाती और वो बाहर धकेल देती। कुछ देर के बाद मैंने पूजा के मुख से लण्ड निकाला और उसे जमीन पर लिटाकर मैं उसके पैरों के बीच बैठ गया।

अब न तो मुझसे रुका जा रहा था और न ही पूजा से।

पूजा बोली- राज, अब बस घुसा दो अपना लण्ड और मेरी आग बुझा दो।

मैंने एक उंगली चूत में देकर आगे पीछे की। चूत पानी से बिल्कुल गीली थी। पूजा चुदने को तड़प रही थी।

मैंने अपना लण्ड चूत को चौड़ा करके उस पर रखा और रगड़ने लगा।

“राज, अब डाल भी दो।”

पूजा का चेहरा दखने लायक था।

मैं बोला- पूजा, दर्द होगा।

“पता है पर तुम बस डालो अब।”

“ठीक है !”

और मैंने एक झटका मारा पर लण्ड फिसल कर गाण्ड के छेद से जा लगा।

“आह ! क्या कर रहे हो राज?”

मैंने एक तकिया लेकर उसके कूल्हों के नीचे रख दिया, अब चूत का छेद ऊपर आ गया, फिर लण्ड चूत पर रखकर उसके कन्धे पकड़ लिये और जोर से झटका मारा। एक बार में ही लण्ड चूत को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा अन्दर चला गया।

पूजा के मुँह से चीख निकली- ऊई ई ई माँ आ अ.. मर गई ई राज ज अ..आँ ! रुको ! बाहर निकालो !

कहानी जारी रहेगी।

[email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top