मेरा गुप्त जीवन -55

(Mera Gupt Jeewan-55 Prema Aunti Ka Chodan Jari)

यश देव 2015-09-10 Comments

This story is part of a series:

प्रेमा आंटी का चोदन जारी

मैं उठा और अपने खड़े लंड को कम्मो के पीछे से चूत में डाल दिया और धीरे धीरे धक्के मारने लगा, वो प्रेमा की सेवा भी करती रही, चुदती भी रही, यही कमाल है कम्मो का!
क्योंकि उसने गर्म चुदाई देखी थी, इसलिए उसको छुटाना भी ज़रूरी था और इसको मैं अपनी ड्यूटी समझता था।
थोड़ी देर में जब वो छूट गई तो मैं उठा और प्रेमा की उसके लबों पर चूमा और फिर मैं कॉलेज जाने के लिए तैयार होने लगा।

उस दिन कॉलेज में दिल नहीं लगा किसी तरह क्लासें खत्म हुईं तो मैं घर के लिए चल ही रहा था कि शानू मिल गई और बोली- सोमू यार, फिर कोई प्रोग्राम रख लो न प्लीज, सिर्फ हम दोनों ही प्लीज।
मैं हँसते हुए बोला- शानू डार्लिंग, प्रोग्राम तो रख लेते हैं पर आजकल मेरे मम्मी पापा मेरे पास आये हुए हैं, वो 3-4 दिन में चले जाएंगे तो रख लेंगे प्रोग्राम। क्यों ठीक है न?
शानू बोली- ठीक है, जब कहोगे मैं तैयार हूँ! ओके, आई लव यू डार्लिंग।
मैं बोला- थैंक्स डार्लिंग, आई लव यू टू!
फिर हम दोनों ने हैंडशेक किया और मैं घर की ओर चल दिया।

घर पहुँचा तो कम्मो ने मेरा हंस कर स्वागत किया, वो मेरे लिए खाना मेरे कमरे में ही ले आई।
फिर उसने अपने आप ही बताना शुरू किया कि प्रेमा बड़ी खुश गई है और उसने माना कि उसकी ऐसी चुदाई आज से पहले नहीं हुई कभी भी। और वो आपकी पूरी तरह से आशिक हो गई है। अब उसको मैंने परसों बुलाया है ताकि तब तक माहवारी के बाद के 13 दिन हो जाएंगे और उसको गर्भवती करने का चांस ज़्यादा बढ़ जाएगा।

मैं बोला- कम्मो डार्लिंग, अब तुम मेरी मालिक हो, जैसे चाहो करो!
कम्मो बोली- जब से आप नैनीताल से आए हो न, डार्लिंग डार्लिंग बहुत करने लगे हो, क्या बात है?
मैं बोला- तुम हो ही इतनी प्यारी मेरी गुरु और मेरी रानी और मेरी डार्लिंग।
वो हँसते हुए बोली- क्या बात है, आज बड़ा प्यार आ रहा मुझ पर?

मैं बोला- कम्मो तुमने काम ही ऐसा किया है आज जब तुमने प्रेमा आंटी को मेरी झोली में डाल दिया तो मैं मान गया कि गुरु हो तो कम्मो जैसी। वैसे तुम को क्या लगता है प्रेमा चुदक्कड़ लंड की प्यासी है?

कम्मो हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, वो तो अब तुम्हारे लंड की प्यासी है, जब इशारा करोगे वो अपनी चूत खोल कर हाज़िर हो जायेगी।
मैं खुश होकर बोला- तब तो ठीक है, कल मैं उसके अंदर छुटाऊंगा ही नहीं तो वो फिर बार बार आएगी कम्मो के पास! क्यों?
कम्मो बोली- नहीं छोटे मालिक, ऐसा नहीं करना, वरना छोटी मछली की खातिर बड़ी मछली भी नहीं हाथ आएगी।
मैं बोला- वो कैसे?

कम्मो बोली- छोटे मालिक, एक बार प्रेमा प्रेग्नेंट हो जाती है न तो हमारे पास इन सेठानियों की लाइन लग जाएंगी क्योंकि सब सेठ पैसे के चक्कर में सेक्स को बिल्कुल भूल जाते हैं और उनकी सेठानियों को चुदाई के लिए तरसना पड़ता है और उनको बच्चा नहीं हो पाता है, तब यह लंड की प्यासी औरतें यह साधू संतों के चक्क्र में पड़ जाती है और वहाँ से बच्चा ले आती हैं।

मैं बोला- आज तो मैं अपनी पुरानी चुदाई शुरू कर सकता हूँ न?
कम्मो बोली- मेरी मानो, जब तक प्रेमा की पूरी चुदाई नहीं हो जाती, तुम दूसरी चुदाई से दूर रहो।
मैं बोला- ठीक है, जैसे गुरु जी कहेंगे, वही ही ठीक है।

कम्मो बोली- आज रात मैं आपके लिए ख़ास दूध बना रही हूँ वो आपको आज और कल पीना पड़ेगा।
मैं बोला- आपका दूध या फिर ग्लासी वाला दूध?
कम्मो हँसते हुए बोली- छोटे मालिक, आप भी ना बच्चों से कम नहीं। मेरा दूध तो आप कई सालों से पी रहे हो, ऊपर नीचे का दूध आप पी लेते हो।

मैं बोला- कम्मो डार्लिंग, अब तुम मुझको छोटे मालिक मत बुलाया करो, मेरे नाम से बुलाओ ना?
कम्मो बोली- अगर मैं नाम से बुलाऊँगी तो बाकी नौकर भी वैसा करेंगे जो ठीक नहीं ना!

कम्मो के सबक को पूरी तरह से माना और जैसा वो कहती रही वैसा ही करता रहा मैं!
दो रात मैं बिल्कुल ब्रह्मचारी बन कर रहा और अगले दिन करीब 10 बजे प्रेमा आ गई।
मैं तैयार था तो ज्यादा टाइम खोये बगैर मैंने प्रेमा को गले लगा लिया और एक गर्म चुम्मी उसके रसीले होटों पर दे दी और फिर अपने हाथ उसके मोटे चूतड़ों पर रख कर धीरे धीरे से मसलने लगा। प्रेमा ने भी मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसको झुक कर चूमने लगी पैंट के बाहर से!

मैंने भी टाइम खोये बगैर अपने पैंट और कमीज़ उतार दी और प्रेमा के ब्लाउज को उतारने लगा, ब्रा के हुक्स भी खोल दिए और उसके संगमरमर जैसे मम्मों को हाथ में लेकर मैं अपने को बड़ा भाग्यशाली समझ रहा था।

जब प्रेमा बिल्कुल नग्न हो गई तो मैं थोड़ा पीछे हट कर उसकी सुन्दरता का अवलोकन करने लगा।

मैं पीछे हटा तो प्रेमा मेरे पास आ गई और मेरे होटों और मुंह पर ताबड़तोड़ चूमियों की बौछार लगा दी।
मेरे हाथ उसकी चूत में काले बालों के बीच घूम रहे थे और उसके गीलेपन का अंदाजा लगा रहे थे, प्रेमा की चूत एकदम गीली हो चुकी और उसने मेरे हाथ अपनी जांघों में जकड़ लिए थे।

कम्मो भी कपड़े उतार कर प्रेमा के मम्मों को चूस रही थी और उसके हाथ प्रेमा के चूतड़ों के ऊपर घूम रहे थे।
अब प्रेमा कम्मो को बेड पर ले आई और उसको होटों पर चूमते हुए उसने कम्मो को लिटा दिया। मैं भी बेड के पास आ गया और प्रेमा ने मेरे लौड़े को अपने हाथ में ले लिया।

मैंने प्रेमा से पूछा- आपको सेक्स के लिए कौन सी पोजीशन अच्छी लगती है?
प्रेमा बोली- वही पोजीशन, जिससे गर्भ ठहर जाए!
मैं बोला- वो पोजीशन तो कम्मो ही बताएगी लेकिन उससे पहले कोई पोजीशन अच्छी लगती है तो बता दीजिए और मैं पहले आपको उस तरह से ही चोद देता हूँ।

प्रेमा बोली- मुझ को खड़े होकर पीछे से चोदना बहुत अछा लगता है क्यूंकि मेरी सारी सहेलियाँ उसी तरह से ही चुदाती हैं लेकिन मेरे पति ने कभी ऐसे नहीं चोदा, मुझको वो तो सिर्फ मेरे ऊपर लेट कर ही चोदना जानते हैं।
मैं बोला- चलो जैसा आपको अच्छा लगता है वैसे ही सही!

मैं जल्दी से उसके चूतड़ों के पीछे खड़ा हो गया और उन संगमरमर के नायाब नमूने को जी भर के देखता रहा और फिर मैंने उनको चूमना शुरू किया।
प्रेमा हिलने लगी क्यूंकि उसको हल्की सी गुदगुदी होने लगी थी।

फिर मैंने अपने तने हुए लंड को हाथ में लेकर उसकी चूत का पीछे से निशाना लगाया और एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर घुसेड़ दिया।
कम्मो प्रेमा के मुंह में अपने मम्मे डाल रही थी और वो बड़े ही आनन्द से उनको चूस रही थी।

हर धक्के के बाद उसका मुंह कम्मो के मम्मों में घुस जाता था, उसने उनको चूसते हुए अपना मुंह को बाहर निकाला तो मैंने फिर एक ज़ोरदार धक्का मारा और प्रेमा का मुंह फिर उसके मम्मों में चला गया।

कम्मो के हाथ प्रेमा के मम्मों के साथ खेल रहे थे, वो उसकी चुचियों को मसलने लगी और वो काली सी गोलियाँ लंड की तरह सख्त खड़ी हो गई।

अब मैंने धक्के तेज़ कर दिए और प्रेमा के चूत का खुलना और बंद होना शुरू हो गया और थोड़ी देर में ही प्रेमा धराशायी हो गई।

मैंने उसको सीधा किया और उसके आधे शरीर को बेड पर लिटा कर बाकी शरीर को अपने हाथों में ले लिया और लंड को अंदर डाल दिया।
प्रेमा ने भी अपनी टांगें मेरी कमर के चारों और फैला दी और मुझको अपनी टांगों में कैद कर लिया। मैं अब बहुत ही धीरे धीरे चोद रहा था क्यूंकि मेरे लंड को आगे पीछे होने के लिए जगह नहीं मिल रही थी तो मैंने प्रेमा की टांगों को अपनी कमर से हटा कर अपने कंधे पर रख दिया और फ़ुल स्पीड से चुदाई शुरू कर दी।

चुदाई की स्पीड को वो महसूस ही कर पा रही थी लेकिन देख नही पा रही थी पर उसकी चूत तो पूरा लंड का हमला सहन कर रही थी। बहुत जल्दी ही उसकी गांड मेरे लंड का जवाब देने लगी यानि वो भी उठ उठ कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी।

अब मैंने धक्के चूत के अंदर दूर तक देने शुरू कर दिए और चूत रानी यह जुल्म सहन नहीं कर पाई और जल्दी ही हथियार डाल दिए, उसमें उठ रही कम्पकंपाहट को मेरे सारे शरीर ने महसूस किया, यहाँ तक कम्मो ने भी महसूस किया और उसने प्रेमा की चूत से टपकते रस को सूंघा और मुझको प्रेमा से अलग होने के लिए कहने लगी।

अब कम्मो ने प्रेमा को सीधा लेट जाने के लिए कहा और मुझको उसके ऊपर चढ़ जाने के लिए उकसाने लगी।
मैं समझ गया कि यह पोजीशन लास्ट एंड फाइनल एक्शन के लिए है और इसके बाद प्रेमा का प्रेग्नेंट होना आवश्यक है।

मैंने प्रेमा की टांगों को चौड़ा किया और उनके बीच बैठ कर अपना लंड उसकी गीली चूत में डाल दिया, पहले धीरे और फिर तेज़ी से धक्के मारने लगा। प्रेमा आँखें बंद किये हुए चुदाई का आनन्द ले रही थी और सारी मेहनत मुझ गरीब को करनी पड़ रही थी।

मैंने भी चुदाई में वेरिएशन लाने की खातिर कभी उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा या फिर उसको अपनी बगल में लेकर धक्के मार रहा था।
प्रेमा को बहुत ही आनन्द आ रहा था जो इस बात से साबित होता था कि उसके मुंह से अपने आप निकल रहे शब्द जैसे ‘मार डाल ज़ालिम, मत छोड़ना साली को और मर गई रे !’

अब मैंने बड़ी तेज़ स्पीड से उसको चोदना जारी रखा और कुछ ही मिनटों में वो फिर झड़ गई।
उसके झड़ने के बाद कम्मो ने इशारा किया कि अब मैं छूटा लूँ अपना। और मैं भी आँखें बंद करके उसको ऐसे गहरे और छोटे धक्केमारने लगा कि दो मिन्ट में ही मेरा फव्वारा पूरी ताकत से छूट गया।

मैंने महसूस किया कि गर्म पानी के अंदर जाते ही प्रेमा फिर काम्पने लगी। मैंने यह भी महसूस किया कि मेरा लंड उसके गर्भ में ही फव्वारा छोड़ रहा है।
मैं छुटाने के बाद उसके मोटे मम्मों पर सर रख कर लेट गया और उसका हाथ मेरे बालों में उँगलियों से कंघी कर रहा था।

कम्मो ने मेरे कान में कहा- धीरे धीरे निकालना लंड को!
मैंने भी हामी में सर हिला दिया।
मैं गोरे और गुदाज़ मम्मों के तकिये पर सर रख कर आराम कर रहा था क्यूंकि बहुत मेहनत करनी पड़ी थी आखिरी चुदाई में!
प्रेमा को भी जैसे मुझको छाती पर लिटा कर बड़ा सकूँ मिल रहा था।

फिर कम्मो ने मुझको इशारा किया कि मैं धीरे से उठूँ और अपना लंड निकाल लूँ।
मैंने ऐसा ही किया और मेरे उठते ही उसने प्रेमा की टांगों को ऊपर कर दिया और उसकी कमर के नीचे एक मोटा तकिया रख दिया। और उसके ऐसे ही लेटे रहने के लिए कहा।

तब तक कम्मो ने मेरा पसीना पौंछ दिया और प्रेमा का भी पसीना पौंछ दिया और उसने मुझको मसालेदार दूध का गिलास पकड़ा दिया।
मैं दूध पीकर काफी दरुस्त हो गया।

मैं जानबूझ कर लेटा रहा क्यूंकि मन में प्रेमा को फिर से नंगी देखने की बहुत ख्वाहिश थी।
थोड़ी देर में कम्मो ने प्रेमा को उठने दिया।
तब कम्मो बोली- छोटे मालिक, आज कॉलेज नहीं जाना क्या?

मैंने उसको आँख मारी और कहा- थोड़ी देर में जाऊँगा।
कम्मो समझ गई कि मेरा इरादा क्या है।

मैं बाथरूम के दरवाज़े पर नज़र लगाए बैठा था, थोड़ी देर बाद प्रेमा अपना मुंह धोकर आई और आते ही मुझसे चिपक गई, मेरे लबों पर धड़ाधड़ चुम्बन करने लगी और जैसे ही उसने शुरू किया मैंने भी उसको अपनी बाँहों में भर कर ज़ोर से जफ़्फ़ी डाली और उसके निप्पलों को चूसने लगा।
मेरा लंड तो अभी भी पूरा खड़ा था और वो उसकी मोटी जांघों के बीच फंसा हुआ था।

मैंने कम्मो की तरफ देखा, वो मुस्करा तो रही थी पर साथ में इशारा भी कर रही थी कि अब बस करो!
पर मेरा लंड था कि मानता ही नहीं था, मैंने प्रेमा को होटों पर चूमते हुए उसको फिर से बिस्तर पर लिटा दिया और उसको घोड़ी बना कर फिर चोदने लगा।

प्रेमा के मखमली और खूबसूरत जिस्म ने मुझको इतना आकर्षित किया हुआ था कि अब मैं उसकी टांगों में बैठ कर लंड को चूत के अंदर डाल कर बड़े ही प्यार से मोहब्बत से उसको चोदने लगा।
प्रेमा भी मुझको बहुत प्यार भरी नज़रों से देख रही थी, मैं ऊपर से उसकी आँखों में आँखें डाल कर बहुत ही धीरे धीरे उस संगमरमर के बुत को चोद रहा था।

मैं इतने धीरे से चोद रहा था उसको कि मेरा लंड थोड़ा ही अंदर जा पाता था और मैं फिर उसको बाहर ले आता था।
मेरा मुंह अब उसके गोल मम्मों पर टिका हुआ था और उनकी ख़ूबसूरती का आनन्द ले रहा था।

तभी कम्मो ने प्रेमा को समय की याद इशारे से दिलाई। लेकिन प्रेमा पर मेरी मस्ती चढ़ी हुई थी और वो ‘थोड़ी देर और बस’ कह रही थी।

अब कम्मो मेरे साथ वाली साइड में आ कर लेट गई और मेरे चूतड़ों को हल्के हल्के थपकी देने लगी। मैं समझ गया कि वो चाहती है कि मैं जल्दी करूँ।

कम्मो अब मेरी गांड में ऊँगली डाल कर मुझको तेज़ी लाने के लिए उकसा रही थी, फिर उसने मेरी आँखों में झाँका और एक किस्म से प्रार्थना कि मैं जल्दी करूँ।

मैंने भी अपनी चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी और अपने दोनों हाथ को प्रेमा के चूतड़ों के नीचे रख दिया और उसको अपने से पूरी तरह से जोड़ कर तेज़ धक्के मारने लगा और चंद मिन्टों में प्रेमा एक बार फिर छूटी और साथ ही मैं भी छूट गया।

मैं अपना लौड़ा उसकी चूत में ही डाले उसके गुदाज़ जिस्म पर लेटा रहा और उसने भी प्यार से मुझको अपनी बाँहों में बांधे रखा।
फिर कम्मो ने हम दोनों को सपने से जगाया और प्रेमा की टांगों को ऊंची ही रखा कुछ देर और फिर मैंने प्रेमा के ऊपर से उठने से पहले उस को एक बड़ी मीठी ‘थैंक यू’ वाली किस दी उसके होटों पर और उसने भी दी मेरे होटों पर!

अब मैं उठा और सीधा बाथरूम में चला गया और अपने को खुद ही साफ़ किया, कपड़े पहन कर जब बाहर आया तो प्रेमा भी तैयार हो चुकी थी।

मैंने प्रेमा से कहा- देखिये, वैसे आज के बाद आपको यहाँ आने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि मैं जानता हूँ आपकी मुराद कम्मो ने पूरी कर देनी है, फिर भी अगर कभी भी आप यहाँ आना चाहें तो आ सकती हैं। क्यों कम्मो?
कम्मो बोली- बिल्कुल! वैसे भी यह तो पहली कोशिश है, पता नहीं एक बार और कोशिश करनी पड़ सकती है। तो आप जब चाहें मुझ को फ़ोन कर दिया कीजिये और यहाँ आ जाए जब चाहें।

प्रेमा बोली- थैंक यू कम्मो जी, आपने मेरी बड़ी सहायता की है, मैं आप और सोमू के व्यवहार से बहुत खुश हूँ। सोमू ने मेरी 6 साल की प्यास को एकदम बुझा दिया है।
कम्मो बोली- याद रखना कि आज आपने अपने पति से चुदवाना ज़रूर है। नहीं तो बाद में बड़े झंझट हो जाते हैं।
प्रेमा बोली- आप फ़िक्र ना करें, जैसा आपने समझाया है, मैं वैसा ही करूंगी। आप बेफिक्र रहें।

प्रेमा जाने लगी तो खुद ही मेरे पास आ गई और मुझको कस के एक जफ़्फ़ी डाली और जाते हुए मेरे लौड़े को भी छूते हुए चली गई।
कम्मो उसके साथ साथ ही थी और उसको बाहर तक छोड़ कर आई।

कम्मो जब वापस आई तो कहने लगी- छोटे मालिक, प्रेमा कह गई है कि वो थोड़े दिनों बाद अवश्य आयेगी ताकि मैं उसका चेकअप कर सकूँ लेकिन अगर सोमू को ज़रूरत हो तो वो ज़रूर आ जाएगी जब तुम बुलाओगे उसको!

मैंने कम्मो को पकड़ लिया और एक बहुत ही टाइट जफ़्फ़ी डाली और उसको एक बहुत ही स्वीट किस दी उसके होटों पर और कहा- कम्मो, यह सब तुम्हारे कारण हो रहा है और मैं तो तुम्हारा प्यारा चेला हूँ न!

यह कहते हुए मैंने कम्मो की धोती को ऊपर करके उसकी चूत पर चिकोटी काट ली और कहा- आज रात तैयार रहना, आज मैं तुम दोनों को छोड़ूंगा नहीं। मैं एक खूंखार बाघ हो गया हूँ और जब तक मुझको अच्छी चूत का मांस नहीं मिलता, मुझ को चैन नहीं पड़ता न!
हम दोनों खूब हँसे।
कहानी जारी रहेगी।
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