जवानी चार दिनों की-2

लेखक : राज कार्तिक

“लगता है तुम्हें भी ठण्ड लग रही है…!” वो मेरे कान में फुसफुसाई और बिना मुझसे पूछे ही उसने अपनी शाल मुझ पर भी ओढ़ा दी।

मैंने हाथ बढ़ा कर अपना हाथ उसके हाथ पर रखा तो उसने भी मेरा हाथ पकड़ लिया। अब कोई गुंजाइश नहीं बची थी। मैं कुछ देर उसका हाथ सहलाता रहा और फिर मेरा हाथ आगे बढ़ने लगा और उसके गोल गोल मस्त मुलायम ब्रा में कसी हुई चूचियों पर पहुँच गया।

वो कुछ नहीं बोली।

मैं भी ब्रा के ऊपर से ही उसके पहाड़ों की ऊचाईयाँ नापने लगा और हल्के हल्के दबाने लगा। उसके बदन की सरसराहट मुझे महसूस हो रही थी। वो भी कसमसा कर मुझ से लिपटती जा रही थी।

मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया तो पहले तो उसने हाथ ऐसे ही रखे रखा और फिर धीरे धीरे लण्ड को पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी। मैं उसकी चूचियाँ मसल रहा था और वो मेरे कंधे पर सर को रखे मेरे लण्ड को सहलाते हुए मज़ा ले रही थी।

मैंने बस में चारों तरफ देखा, सब सो रहे थे। मैंने मौके का फायदा उठाया और शॉल के अंदर सर करके पायल के होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले तो वो घबराई पर फिर जब मैंने बताया कि सब सो रहे है तो वो भी चुम्बन में मेरा साथ देने लगी।

रात के लगभग तीन बज चुके थे और हम लुधियाना पहुँच चुके थे। बस में थोड़ी हलचल हुई तो हम भी अलग होकर बैठ गए। अब लगभग एक घंटे भर का सफर ही बाकी था। बस में इस से ज्यादा कुछ हो भी नहीं सकता था। सो बस ऐसे ही शाल में लिपटे हुए सफर का मज़ा ले रहे थे।

मन ही मन प्रोग्राम बना रहा था कि जालंधर पहुँच कर कैसे पायल की चूत को अपने लण्ड की गर्मी से मस्त पानी पानी करना है।

बस जालंधर पहुँच गई थी, बस स्टैंड पर उतर कर पायल ने मुझ से मेरा मोबाइल माँगा। वो विक्रम को फोन करना चाहती थी। पर मैं कुछ देर और पायल के साथ अकेला रहना चाहता था क्यूंकि शादी वाले घर में तो जाते ही पायल रिश्तेदारों की भीड़ में खो जाती।

मौसम में सुबह सुबह की ठंडक और तरावट भरी हुई थी। बस स्टैंड पर ही एक चाय वाले की दुकान खुली ही थी तो हम तीनों दुकान पर पहुँच गए और चाय आर्डर कर दी।

महक फ्रेश होना चाहती थी तो वो बस स्टैंड पर ही बने सुलभ शौचालय में चली गई।

पायल और मैं एक ही बेंच पर बैठे थे।

“पायल… तुमने तो मुझे अपना दीवाना बना दिया है… आई लव यू पायल…”

पायल मेरी आँखों में देखते हुए मुस्कुराई और फिर ‘लव यु टू राज… पर !’

उसने अपनी बात अधूरी छोड़ी तो मैंने पूछा– पर क्या….?

“राज… मैं शादीशुदा हूँ… और तुम समझ सकते हो कि एक शादीशुदा को किसी पराये मर्द से प्यार करने का कोई हक नहीं होता।”

“पर तुम मेरे दिल में बस गई हो पायल और अब तुम्हारे बिना रहना मेरे लिए मुश्किल होगा… और फिर भगवान ने भी कुछ सोच कर ही हम दोनों को मिलवाया होगा !”

“तुम बहुत अच्छे हो राज…” वो कहकर मुस्कुराई और फिर से मेरे कंधे से लग गई।

तभी महक और चाय दोनों एक साथ आ गई। पायल सीधे होकर बैठ गई।

पूरे सफर में महक अपने आप में ही मस्त थी। उसने सिर्फ एक बार पायल से मेरे बारे में पूछा था और उसके बाद अब वो मेरे सामने थी। उसने भी शाल ओढ़ रखी थी। वो हमारे सामने बैठ कर चाय पीने लगी।

मैंने तब पहली बार महक को ध्यान से देखा। वो मुँह-हाथ धो कर आई थी और बाल भी ठीक कर लिए थे तो एक चमक सी थी चेहरे पर। मैंने महक को देखा तो महसूस किया कि महक पायल से किसी भी मायने में कम नहीं थी। वो भी बहुत खूबसूरत थी और जवानी की निशानियाँ उसकी भी गजब की थी।

चाय पीने के बाद मैंने विक्रम को फोन किया तो दो-तीन बार में उसने फोन उठाया। जब मैंने उसे बताया कि हम जालंधर बस-स्टैंड पर है तो उसने गाड़ी भेजने का बोल कर फोन काट दिया।

गाड़ी करीब आधे घंटे बाद आई। तब तक पायल मेरे कंधे पर सर रखे बैठी रही। महक चुपचाप बैठी पायल की तरफ देखती रही। मैं थोड़ा हैरान था कि पायल कैसे अपनी बहन के सामने ही एक पराये मर्द के साथ लिपट कर बैठी हुई थी।

जब हम विक्रम के घर पहुँचे तो सुबह के लगभग साढ़े पाँच बज चुके थे और घर के बहुत से लोग जाग चुके थे। विक्रम अभी सो रहा था। वो काम के कारण रात को देर से सोया था। मैंने उसको जाकर उठाया तो वो खुश हो गया और फिर मैं भी वही उसके बेड पर लेट गया और सारी रात की नींद से थकी आँखें कब बंद हो गई पता ही नहीं चला।

जब उठा तो दोपहर का करीब एक बज रहा था। मुझे किसी ने पकड़ कर हिलाया तो मेरी नींद खुली और आँख खोलते ही सामने मेरी नई महबूबा पायल खड़ी थी।

“उठो मेरे राजा जी… शादी में आये हो या नींद पूरी करने…?” कहकर वो हंस पड़ी।

मैं हड़बड़ा कर उठा तो देखा कि कमरे में पायल और मैं ही थे। मैं उठ खड़ा हुआ और एक ही झटके में पायल को अपनी बाहों में लेकर उसके होंठों पर एक जोरदार किस कर दिया।

पायल मुझ से छुड़वा कर अलग हो गई- तुम पागल हो क्या…? यह शादी वाला घर है मिस्टर…!

मैंने उसको एक फ़्लाइंग किस किया और फिर बाथरूम में घुस गया। बाथरूम का दरवाजा बंद करते हुए मैंने देखा पायल वहीं खड़ी मुस्कुरा रही थी।

उसके बाद शादी की रस्में शुरू हो गई और फिर पायल और मैं अकेले नहीं मिल पाए। पायल मेरे आसपास ही मंडरा रही थी और जब वो आँखों से ओझल होती तो मैं भी उसको ढूंढने के लिए बेचैन हो उठता। ऐसे ही सारा दिन निकल गया। हम दोनों शादी की भीड़ में भी एक दूसरे में खोये हुए थे। मैं तो मौके की तलाश में था कि कब मुझे मौका मिले और मैं पायल के मस्त बदन का मज़ा ले सकूँ। पायल को चोदने के लिए मेरा लण्ड बेकरार था।

रात को बारात थी। प्रोग्राम विक्रम के घर से कुछ ही दूरी पर एक मैरिज-पैलेस में था। शाम को करीब सात बजे सब सजधज कर नाचते कूदते घर से निकले। मैं भी मस्ती में था। पंजाबी शादी में शराब-कवाब की कोई कमी नहीं होती। मैंने भी दो-तीन पैग चढ़ा लिए थे और मैं भी पूरी मस्ती में नाच रहा था और अपने दोस्त की शादी को एन्जॉय कर रहा था।

पायल भी दूसरी औरतों के साथ अलग नाच रही थी। भीड़ में मेरी नजर पायल पर ही टिकी हुई थी। बारात कुछ आगे बढ़ी तो आदमी और औरतें सब एक साथ नाचने लगे। बस इसी बीच मुझे भी मौका मिल गया अपनी नई महबूबा संग नाचने का। पायल और मैं दोनों एक दूसरे का हाथ हाथ में लेकर नाचने लगे।

“पायल… इस ड्रेस में तो क़यामत लग रही हो।”

“तुम भी बहुत हेंडसम लग रहे हो… देखो तो शादी में कितनी लड़कियों की नजर सिर्फ तुम पर ही है।” कहकर वो खिलखिला कर हंस पड़ी।

बारात अपने निर्धारित स्थान पर पहुँच गई थी। फिर गेट पर रिबन का प्रोग्राम हुआ और सबने खूब मस्ती की। अंदर जाकर डी.जे. पर खूब मस्ती हुई। खूब दिल खोल कर नाचे और पैसे लुटाए। थक हार कर फिर खाना खाने लगे। विक्रम फेरे लेने के लिए चला गया और मैं पायल संग खाना खाने चला गया।

“पायल… तुम्हें चूमने का बहुत दिल कर रहा है… प्लीज एक किस दो ना..!”

“तुम पागल हो… सब लोगों के बीच में किस…? मिस्टर होश करो…”

तभी मुझे याद आया कि विक्रम की गाड़ी की चाबी मेरे पास है। मैंने पायल को बाहर गेट पर आने को कहा और खुद गाड़ी निकालने चल पड़ा।

जब पार्किंग से गाड़ी निकल कर बाहर आया तो देखा पायल गेट पर ही खड़ी थी। मैंने उसको गाड़ी में बुलाया तो वो आकर बैठ गई और मैंने भी गाड़ी सड़क पर दौड़ा दी।

“राज… सब लोग क्या सोचेंगे यार… अगर किसी को पता लग गया तो कि मैं तुम्हारे साथ ऐसे अकेली गाड़ी में घूम रही हूँ तो…?”

“पायल, यह रात फिर नहीं मिलेगी मेरी जान… बस अब कुछ ना कहो !”

“पर हम जा कहाँ रहे हैं?”

“देखते हैं कोई तो जगह मिल ही जायेगी दो दीवानों को प्यार करने के लिए !”

मैं गाड़ी हाइवे पर ले आया और सामने ही मुझे एक गेस्ट हाउस नजर आया। रात के दो बज रहे थे। मैंने गाड़ी रोकी तो चौकीदार दौड़ कर आया। मैंने उसको पचास का नोट दिया और कमरे के बारे में पूछा तो उसने अंदर आने को कहा।

अंदर जाकर बोला- सर… कमरा तो कोई खाली नहीं है।

“तो साले तूने बाहर क्यों नहीं बताया…?”

“सर वो ऐसा है कि एक कमरा है तो पर वो गेस्ट हाउस के मालिक का है… अगर आप लोग सुबह पाँच बजे से पहले खाली कर दो तो वो कमरा मैं आप लोगो के लिए खोल सकता हूँ पर पाँच सौ रुपये लगेंगे।”

मैंने बिना देर किये गाँधी छाप पाँच सौ का नोट निकल कर उसके हाथ पर रखा और उसने बिना देर किये कमरा खोल दिया। पायल चुपचाप यह सब देख रही थी पर बोल कुछ नहीं रही थी।

कमरा शानदार था। आखिर गेस्ट हाउस के मालिक का था। बिल्कुल साफ़ सुथरा। एक साइड में सोफा और मेज लगी थी और दूसरी साइड में एक बड़े वाला सिंगल बेड था। पर हमें कौन सा यहाँ सोना था।

चौकीदार के जाते ही मैंने दरवाजा अंदर से बंद किया और पकड़ कर पायल को अपनी बाहों में भर लिया।

“बहुत बेताब हो मुझे चोदने के लिए…?”

पायल के मुख से यह ‘चोदना’ शब्द सुन एक पल को तो मैं हैरान रह गया लेकिन…

कहानी जारी रहेगी।

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