आज दिल खोल कर चुदूँगी -6

(Aaj Dil Khol Kar Chudungi-6)

नेहा रानी 2014-11-06 Comments

This story is part of a series:

फिर मैं और सुनील होटल से बाहर आए सुनील के साथ बाइक पर बैठ कर चल दी।
रास्ते में सुनील बोला- जयदीप जी बोल रहे थे कि नेहा बहुत मस्त लौंडिया है, उसकी शादी जरूर हुई है, पर बिल्कुल कोरा माल है.. दिल खुश कर दिया। उसे एक बार और नीचे लेने की इच्छा है।

मैं बोली- सुनील जी आपने क्या जवाब दिया?

सुनील हँसते हुए बोला- जान.. मैं भी यही बोला कि जब बोलो आपके लौड़े के नीचे ला देंगे, बस आपके एक इशारा चाहिए।

मैं आप लोगों को यहाँ फ़िर से एक बार बताना चाहती हूँ कि मेरी नई-नई शादी हुई थी, अभी तो ठीक से पति ने चोदा भी नहीं था, मैं कली से फूल भी नहीं हुई थी.. कि मुझे गैर मर्दों से चुदना पड़ा।
हालांकि इसमें मेरी भी मर्जी थी। मुझे नए-नए लौड़ों से चुदने की बड़ी इच्छा थी।

अब आगे कहानी पर आती हूँ।

सुनील से बातें करते-करते कब कमरे पर पहुँची, मुझे पता ही नहीं चला।
सुनील ने बाइक रोकी, तब पता चला कि हम लोग कमरे पर पहुँच गए।

मैं बाइक से उतर कर सीधे कमरे के अन्दर गई, वहाँ देखा कि आकाश बैठा था।

वो मुझे देख कर बोला- जान.. कोई दिक्कत तो नहीं हुई ना?

मैं कुछ बोलती इससे पहले सुनील पीछे से बोला- मेरे रहते क्या दिक्कत होती।

तब आकाश बोले- सही बोले.. सुनील भाई आप हो, तो मुझे कोई परवाह नहीं।

सुनील थोड़ा मुस्कुराया।

फिर मेरे पति बोले- सुनील भाई, आज कोई मीटिंग मत रखना, आज मैं चाहता हूँ कि नेहा को कहीं घुमा लाऊँ।

तो सुनील बोले- ठीक है.. वैसे आज मुझे कुछ काम से मथुरा जाना था.. चलो आज आप लोग भी मौज-मस्ती करो, फिर शाम को मुलाकात होगी। मैं जाते वक्त नीचे चाय बोलता जाऊँगा।

सुनील के जाने के बाद हम लोग फ्रेश हुए तभी चाय वाला आया, हम दोनों ने चाय पी और फिर मेरे पति ने मुझसे पूछा- रात कैसी रही?

मैंने अपनी चुदाई की पूरी कहानी अपने पति आकाश को बताई कि रात क्या हुआ और मैं खूब चुदी।

मुझसे इस बातचीत के दौरान मेरे पति मेरे मम्मे दबा रहे थे और एक हाथ से चूत सहला रहे थे।
मेरा तो मन तो था ही नहीं…. क्योंकि पूरी रात की चुदाई से बिल्कुल थकी हुई थी, मेरी चूत भी सूखी थी, पर पति की इच्छा थी, सो मैं भी साथ दे रही थी।

पति रात की बात सुन इतना गर्म हो गए कि उन्होंने मेरी सूखी बुर में लंड पेल दिया और 10-15 धक्के लगा कर ‘पुल्ल-पुल्ल’ की और झड़ गए।

फिर मैं नहाने चली गई।

जब बाहर आई तो आकाश बोले- लग रहा कि मेरी तबियत ठीक नहीं है.. बुखार सा है।

जब मैंने देखा तो वाकयी बुखार था, मैं बोली- चलो डॉक्टर को दिखा कर दवा ले लो..

डाक्टर के पास जा दवा ली और दवा खा आकाश को आराम करने को बोली।

कुछ देर बाद जब दवाई ने असर किया तो आकाश बोले- अब कुछ ठीक है चलो, कहीं घूमने चलते हैं।

पर मैंने मना कर दिया- नहीं.. फिर कभी चलेंगे.. जब तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे। अभी अच्छा भी नहीं लगेगा कि तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है और मैं इसी वक्त घूमने जाऊँ।

तभी सुनील का फोन आया- आकाश जी मैं निकल रहा था.. सोचा कि एक बार पूछ लूँ.. कोई काम तो नहीं?

पति बोले- यार मुझे बुखार हो गया है और नेहा ने भी इसी कारण घूमने जाने से मना कर दिया है, एक बात कहूँ.. तुमको यदि ठीक लगे तो नेहा को अपने साथ ले जाते.. बेचारी तुम्हारे साथ ही घूम लेती।

सुनील बोला- भाई.. इसमें ठीक लगने की क्या बात.. मैं उधर से ही नेहा को लेते हुए निकल लूँगा।

सुनील के फोन रखने पर पति ने बताया- तुम तैयार हो जाओ.. सुनील आ रहे हैं तुम जाओ घूम आओ।

मैंने मना कर दिया- मैं आपको इस हालत में छोड़ कर नहीं जा सकती।

पर पति के जिद के आगे जाना पड़ा।

कुछ देर में सुनील आए और आकाश से बोले- मैं बाइक छोड़ देता हूँ, हो सकता है कि तुमको कोई जरुरत पड़े.. हम लोग बस से जाएंगे।

मैं और सुनील बस में चढ़े, पर बस में बहुत भीड़ थी, बड़ी मुश्किल से खड़े होने के लिए जगह बन पाई।

सुनील जी बोले- नेहा भीड़ बहुत है, दूसरी बस से चलें।

मैं बोली- अब बस में चढ़ चुके हैं तो इसी से चलो.. क्या पता दूसरी में भी यही हाल हो।

तभी बस चल पड़ी। बस में सुनील मेरे आगे थे, मैं उनके पीछे कुछ दूर थी।

बस चलने के बाद मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे चूतड़ पर हाथ सहला रहा है। मैंने भीड़ के कारण ध्यान नहीं दिया, पर जब मुझे लगा कि कोई सख्त चीज़ मेरी गाण्ड की दरार में चुभ रही है, तो मैंने पीछे हाथ कर देखना चाहा।

तो मेरे पीछे खड़े आदमी के पैंट पर हाथ चला गया और तभी मुझे उसके खड़े लण्ड का अहसास हुआ।

उस आदमी का लंड मोटा था और मैंने उसकी तरफ देख कर शरमा कर झट से अपना हाथ खींच लिया और उसके मोटे लंड के बारे में सोच कर मुझे एक शरारत सूझने लगी, मुझ पर वासना हावी होने लगी।
मैं अपने चूतड़ों को उसके लंड पर दबाने लगी। मैं जताना चाहती थी कि मैं बुरा नहीं मानूंगी।

तभी बस का ब्रेक लगा और अच्छा मौका जान कर उस आदमी ने मेरी कुर्ती के ऊपर से मेरी एक छाती को पकड़ लिया और जोर से मसल दिया।

मेरे मुँह से ‘आह’ निकल गई।

सुनील मेरी आह सुनकर पूछने लगे- क्या हुआ.. कोई दिक्कत तो नहीं?

मैंने ‘ना’ में सर हिला दिया, तब तक बस पुनः चल दी।

वो आदमी ने मेरे चूतड़ों को मसलने लगा, मैंने डर कर बस में इधर-उधर देखा कि कोई देख तो नहीं रहा, पर भीड़ की वजह से सभी एक दूसरे से सटे हुए थे।

तभी उस आदमी ने मेरे कान में बोला- कोई दिक्कत न हो, तो थोड़ा इधर को आ जा..

मेरे कुछ कहने से पहले ही उसने मुझे अपने से चिपका लिया, शायद वह समझ गया था कि मैं उसकी हरकतों से सहमत हूँ।
मैं एक लैगी पहने थी, उस आदमी ने मेरी लैगी के अन्दर हाथ डाल कर मेरी पैन्टी के बगल से चूत को सहलाते हुए एक ऊँगली मेरी चूत में डाल दी।

मैं चिहुंक उठी और मुँह से सिस्कारते हुए नशीली निगाहों से उसकी तरफ देखने लगी।

वो मेरी चूत में ऊँगली से चोदे जा रहा था।

तभी मैंने पीछे हाथ करके उसका लण्ड पकड़ लिया, फिर धीरे से उसकी जिप नीचे खींच दी और अन्दर हाथ डाला।

वो तो अन्दर कुछ नहीं पहने था.. मेरे हाथ का सीधा सामना उसके लौड़े से हुआ।

मैंने उस आदमी को देख कर आँख मार दी।

अब तो वो बिल्कुल समझ गया कि मेरे इरादे क्या हैं। उसके लंड को पकड़ कर मैं आगे-पीछे कर रही थी।

तभी उसने मेरा हाथ लौड़े से हटा दिया और मेरी लैगी को थोड़ा नीचे खींच मेरी चिकनी गाण्ड और चूत पर लौड़े को ऊपर-नीचे घिसने लगा।

बस में इतनी भीड़ थी कि कौन क्या कर रहा है, किसी को पता ही नहीं चल सकता था।

आदमी बस के साथ हिल-हिल कर अपना लंड मेरी चूत से रगड़ने लगा।
पैन्टी की वजह से उसका लंड चूत से ठीक से रगड़ नहीं पा रहा था तो मैंने थोड़ा सा झुक कर अपनी पैन्टी साइड में कर दी और उसके लंड को अपनी चूत के दरवाजे पर लगा दिया।
अब उसका लंड मेरी चूत पर टक्कर मार रहा था और उसका लंड मेरी चूत के मुँह में घुसा हुआ मुझे धीरे-धीरे चोद रहा था।

मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया, मुझे लगा कि मैं उससे कह दूँ- डरो मत.. हचक कर चोदो मुझे.. दिल खोल कर चोद.. भूल जा कि मैं बस में हूँ।

वो एक हाथ से मेरी छाती को कुर्ती के अन्दर से मसक रहा था।
मेरी आँखें मुंद गईं.. मैं भूल गई कि मैं बस में हूँ।

उसने कुछ देर बाद एक-दो तेज झटके मारे और मेरी पैन्टी पर पूरा पानी छोड़ दिया।

मैं तो पहले ही अपना पानी छोड़ चुकी थी और मेरी चूत से पानी धीरे-धीरे रिस रहा था।

मेरी सारी पैन्टी ख़राब हो गई और उसने अपना लंड निकाल कर अपने रुमाल से पौंछ कर अन्दर कर लिया। मैंने बेमन से अपना पजामा और पैन्टी खींच कर सही किया।

तभी सुनील बोले- चलो स्टॉप आ गया..

बस रुकी, मैं और सुनील बस से उतर कर चल दिए।

सुनील बोले- यहाँ से कुछ दूर जाना है एक रिक्शा कर लेते हैं।

तभी सुनील की निगाह मेरे पिछवाड़े पर गई।

सुनील बोले- नेहा जान ये भीग कैसे गई?

मैंने नाटक करते हुए चौंकी- अरे…ये कैसे हुआ… मुझे पता ही नहीं चला?

तभी एक रिक्शा मिला सुनील और मैं उस पर बैठ गए। सुनील रिक्शे वाले को जहाँ जाना था वहाँ की बोले, फिर बगल से मेरी चूत पर हाथ रख कर गीलेपन को छू कर नाक से सूँघ कर बोले- वाह रानी.. काम निपटा लिया.. लग रहा है कि बस में तुम्हारे पीछे वाले ने चोद कर माल छोड़ा है?

मैं क्या कहती, पर सुनील से बोली- साले ने अपना रस तो निकाल लिया और मेरी चूत को प्यासी छोड़ दिया।

सुनील ने मेरी तरफ प्यार से देखा।

अब तक की कहानी कैसी लगी, मुझे ईमेल जरूर करना।

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