कॉलेज गर्ल की इंडियन सेक्स स्टोरी-7

(College Girl Ki Indian Sex Story- Part 7)

This story is part of a series:

आपने अब तक की इस हिंदी सेक्स कहानी में पढ़ा था कि अमित ने मुझे नंगा देखने की ख्वाहिश की थी जो मैंने अपनी रजामंदी से उसके सामने खुद को नंगी करवा कर पूरी कर दी थी. मैं उससे नाराज हूँ, ऐसा शो करके वापस आ गई.
अब आगे..

फिर वह दिन बीत गया अमित ने कोई एसएमएस नहीं किया, दूसरा दिन भी बीत गया और दिव्या नहीं आई थी. वो किसी काम की वजह से दो दिन बाद आने वाली थी.

मंगलवार की दोपहर में जैसा मैंने कहा था अमित ने कॉल किया- हैलो मिनी, उस दिन के लिए आई ऍम सो सॉरी..
मैंने ऐसे ही कहा- ठीक है कोई बात नहीं.
अमित- अगर मुझे माफ़ कर दिया है तो आज 4 बजे मेरे घर आ जाना और अपनी पार्टी ले लेना.
मैं- ठीक है आ जाऊँगी.

फिर मैं कॉलेज चली गई. तीन बजे तक मैं घर आ गई और अमित के यहाँ जाने के लिए मैं तैयार होने लगी. इतनी बार चूचियां दबवाने से कुछ बड़ी हो गई थीं. अब वो 33 साइज़ की हो गई थीं. पहले 32 की थीं.

उस दिन मैंने ब्रा पहनी तो बहुत टाइट हो गई थी, तो जो अमित ने ही दूसरी ड्रेस दी थी, मैंने उसी को पहन लिया. इसमें ब्रा को नहीं पहना जाता था.. मैंने पैंटी भी नहीं पहनी. इसमें दाहिनी तरफ चूची से नीचे तक चैन थी, हल्का पीठ की तरफ. मैंने वही पहन ली और जाने के लिए निकल गई.

थोड़ी देर बाद मैं पहुँच गई. मैंने बेल बजाई तो अमित ने कहा कि अन्दर आ जाओ, दरवाजा खुला है.
मुझे तो पता ही था कि मुझे क्या देखना है और मैं पहले एक बार देख भी चुकी थी तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हो रही थी. मैं अन्दर चली गई.
अमित- हे डियर, मेरे रूम में बैठो और बाहर वाला दरवाजा बंद कर लो.
मैंने दरवाजा बंद करके कहा- ठीक है.
मैं जाकर उसके रूम में बैठ गई

अमित थोड़ी देर बाद तौलिया बांधे हुए आया तो मैं खड़ी हो गई तो उसने ऐसे ही मुझे गले से लगा लिया और कहा- काफी अच्छी दिख रही हो.
यह कह कर उसने मेरी ड्रेस की चैन का लॉक खोल दिया. इसको मैंने गौर नहीं किया.. क्योंकि ड्रेस टाइट थी तो लॉक खुल जाने से वो धीरे धीरे खुल रही थी. मेरी चूचियां दिखने लगी थीं.

अमित एक गिफ्ट लाया और कहा- देखो, यह तुम्हारे लिए है.
मैंने उठाया तो उसमें वजन था, मैं खोल के देखने लगीं. वो उसी तरफ बैठा था जिस तरफ चैन थी.. उसने थोड़ी सी और नीचे करके मेरी कमर पर कर दी.

मैंने खोला तो देखा लैपटॉप था, मैं मारे ख़ुशी के भूल गई कि मेरी चैन कहां तक बंद है.
मैंने हैरत से कहा- ये मेरे लिए है!
अमित ने खड़ा होकर कहा- हां जानेमन जी.. उस दिन की गलती की पूर्ति की है.

फिर मैं उठ कर उसके गले लग गई, इसी जल्दबाजी में उसने अपनी तौलिया मेरे ड्रेस में फंसा दिया और मेरी ड्रेस की पूरी चैन खोल दी.

मैं जैसे ही हटी उससे तो कुछ नहीं हुआ, क्योंकि अब तक अमित का हाथ पीठ पर था. फिर वो जैसे ही थोड़ी दूर हुआ तो उसकी तौलिया खुल गई. अब उसका छोटा सा लंड सामने झूलता हुआ दिख रहा था. मेरी भी ड्रेस मेरे बायें हाथ पर अटक गई थी.

अमित वो हाथ की ड्रेस पकड़ कर ही दूर हो गया था, तो साथ में वो ड्रेस भी पूरी निकल गई. अब मैं और अमित दोनों बिना कपड़े के एक दूसरे के सामने खड़े थे. अमित ने तुरंत मुझे उसी अवस्था में अपने गले से लगा लिया और कहा- आई लव यू मिनी…

उसने मुझे अपनी बांहों में उठा लिया. मैं भी कुछ नहीं कह रही थी. तभी अमित मेरे होंठों को अपने होंठों से चबाने लगा और कसके दबाए हुआ था तो उसका लंड मेरे पेट पर बढ़ता हुआ लग रहा था. तभी उसने मेरे होंठों पर काट कर खून निकाल दिया और मुझे घुमा कर पीछे से मेरी चुचियों को पकड़ लिया. वो अब भी पीछे से ही मेरा सर ऊपर करके मेरे होंठों पर किस कर रहा था. नीचे उसका लंड मेरी गांड की दरार में घुसता हुआ महसूस हुआ, जो बड़ा हो रहा था.

अमित मेरी चुचियों को दबाने लगा. काफी तेज तेज दबा रहा था. अब उसका लंड लग रहा था कि मेरी गांड में घुस ही जाएगा. तभी अमित ने मुझे छोड़ा और अपनी रैक के पास ले गया. वहां से एक क्रीम निकाल कर अपने हाथों पर लगा ली.. थोड़ी मेरी चुचियों पर भी मल दी. शायद उसने इस क्रीम को अपने लंड पर भी लगा ली थी.

अब वो फिर से उसी तरह खड़ा हो गया. मेरी गांड के छेद पर अपना लंड रख कर. वो मेरी चुचियों को तेज तेज दबा कर उस क्रीम से मालिश करने लगा.
मैं ऊपर बढ़ती जा रही थी क्योंकि नीचे मेरी गांड में अमित का लंड घुसने वाला था. काफी देर उसने मेरे मम्मों की मालिश की. तब तक मैं अपनी गांड को बचा रही थी, थोड़ा ऊपर उठी थी.

तभी अमित थोड़ा नीचे हुआ तो मैं सही से खड़ी हो गई. जैसे ही मैं सही से खड़ी हुई कि अमित तेजी के साथ ऊपर बढ़ा और उसका थोड़ा सा लंड मेरी गांड में घुस गया.
मेरे मुँह से निकला- हाय राम रे मर गई ये क्या है.. आह्ह्ह्ह्ह.. आआअह.. ऊओह्ह.. मर गई मैं..

अमित तब तक रुका रहा.. जब तक मैं शांत ना हो गई. तब तक वह मेरी चूचियां मसलता रहा. अमित ने लंड निकाला नहीं था. फिर मेरे शांत होने पर ऊपर की ओर इतने जोर से झटका मारा कि मेरी जान ही निकल गई. उसका आधा लंड मेरी गांड में चला गया था. मेरी गांड फटने की कगार पर पहुँच गई थी ‘आ.. आआअहह.. आ.. ऊऊह्ह्ह्ह.. मर गई मम्मी.. हाय राम रे…
यही मेरे मुँह से निकल रहा था और वो था कि मेरी चूचियां ही दबाता चला जा रहा.

फिर मेरे शांत होने पर उसने जोर से झटका मारा और इस बार पूरा लंड अन्दर चला गया. मैं चिल्ला कर ऊपर उछल पड़ी तो थोड़ा लंड निकल गया. लेकिन जब मैं उछलने के बाद नीचे आई तो अमित ऊपर उठ गया और मेरी गांड में अमित का पूरा लंड चला गया. मुझे बहुत दर्द हो रहा था इसलिए वो मेरे होंठों को अपने होंठों से दबाए था. मेरे मम्मों को दबाए जा रहा था.

फिर उसने लंड को आगे पीछे मतलब अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. पहले तो धीरे धीरे कर रहा था कि कुछ देर के बाद मेरे कंधों को पकड़ कर मुझे आगे झुका दिया और अब वो लंड को मेरी गांड में जल्दी जल्दी अन्दर बाहर करने लगा. पहले तो मुझे दर्द हुआ लेकिन बाद में मज़ा आने लगा. मैं पूरा साथ देने लगी.

उसने और तेज चुदाई शुरू कर दी. कुछ ही झटकों में उसके लंड की वीर्य की पिचकारी मेरी गांड के अन्दर ही छूट गई, गर्म गर्म वीर्य का अहसास मुझे बहुत अच्छा लगा.

कुछ पल बाद उसने अपने लंड को निकाला और मुझसे कहा इसे पकड़ कर मुँह में लो.
मैंने कहा कि ये गन्दा है, मैं इसे मुँह में कैसे ले लूँ?
उसने कहा- ये लड़कियां मुँह में लेकर मजा करती हैं.
मैंने कहा- मैं नहीं करूँगी.. गन्दा है… देखो क्या सब लगा है.. मैं ना हाथ लगाऊँगी.
अमित ने कहा- साफ कर दूँ तब तो हाथ लगाओगी?
मैंने कहा- हाँ.

तो उसने मेरे हाथ में पकड़ा दिया और कहा- चलो तुम ही अपनी मर्जी से जितना साफ करना है, कर लो. फिर मुँह में ले लो. वो मुझे पकड़े पकड़े वाशरूम की तरफ लेकर चल दिया. मैं भी लंड पकड़े पकड़े वाशरूम में चली गई.. वहाँ पहले मैंने उस पर पानी डाला फिर उस पर साबुन लगा कर लंड को रगड़ने लगी और पानी से लंड धो दिया.
अब अमित ने कहा- मिनी देखो अब साफ है.. एक बार मुँह में ले लो.

इधर ताजी ताजी मेरी ‘गांड मारी’ हुई थी, तो मैं सही से चल नहीं पा रही थी.
मैंने कहा- बाहर तो चलो.
उसने कहा- नहीं यहीं पर करके चलो. मैं अपना मुँह उसके लंड के करीब ले गई पर लंड अन्दर नहीं लिया.

अमित ने जबरदस्ती मेरा मुँह में थोड़ा सा लंड पेल दिया. अब लंड छोटा हो गया था तो आसानी से पूरा मेरे मुँह में चला गया. मैं उसके लंड को चूसने लगी.
मैं लंड चूस रही थी तो वो बड़ा होने लगा और फिर इतना बड़ा हो गया कि मेरे मुँह में आ नहीं रहा था.
मैंने लंड बाहर निकाल दिया.

अमित ने कहा- इसे पकड़े रहो और आगे पीछे करती रहो.
मैं वैसे करती करती कमरे में आ गई.

यहाँ अमित ने वही क्रीम फिर निकाली और अपने हाथों और मेरी चुचियों पर लगा दी. तभी मेरे मोबाइल पर दिव्या की कॉल आ गई. उसने कहा कि जल्दी से घर पहुँचो, तेरे भैया मेरे साथ आने वाले हैं.
मैं कहा- सब साफ कर दो, कपड़े सही कर दो.

अमित ने मुझे पीछे घुमाया और जो क्रीम लगाई थी उसकी मालिश दोनों हाथों से करने लगा.

कुछ देर करीब 10 मिनट दबा दबा कर मेरे मम्मों की मालिश की फिर कहा- तौलिये से पौंछ लो और कपड़े पहन लो.
मैंने कपड़े पहन लिए, अमित ने भी पहन लिए. मैंने अपना गिफ्ट उठाया जिसके लिए गांड मरवाई थी और अमित मुझे छोड़ने चल दिया.

अमित- मिनी. तुम बहुत अच्छी हो बस एक कमी है, जो दूर हो जाए तो तुम बहुत अच्छी लगने लगोगी.
मैं- क्या कमी है?
अमित- जो क्रीम मैंने दो बार तुम्हें लगा कर मालिश की थी, अपने मम्मों पर यही हफ्ते में 2-3 बार लगाओ और अपने चूतड़ों पर लगाओ.
मैं- क्या है इसमें क्या होगा इससे?
अमित- तुम एक महीने इसे लगा लो तो तुम अपने आप जान जाओगी.
मैं- दिव्या रहती है, मैं कैसे लगा पाऊँगी?
अमित- तुमको जब समय मिले तो मेरे कमरे पर 20 मिनट मालिश करवाने आ जाया करना बस फिर देखना क्या कमाल हो जाएगा.
मैं- नहीं..
अमित- अरे सच में मैं केवल दोनों जगह की मालिश करूँगा.. और कुछ नहीं करूँगा.. कसम से.
मैं- ठीक है.

फिर मैं घर पहुँच गई और मैं सही से चल नहीं पा रही थी. मैंने कमरा सही किया और लेट गई. कुछ देर बाद दिव्या आई.. भैया आए और चले गए.

फिर वही सब रोज की तरह चलने लगा. अब अमित से मेरी हर तरह की बातें होने लगी थीं. अवी से भी मैं सारी बातें करती थीं, लेकिन अब मेरी चूचियां कुछ बड़ी हो गई थीं. अब मुझे 32 नंबर ब्रा होती ही नहीं थी.. शायद जो इतना दबवाया था उसी की वजह से मेरे मम्मे बड़े हो गए थे.

मुझे अमित से मिले एक हफ्ता हो गया था तो उसने मुझे एसएमएस किया- मालिश के लिए कब आ रही हो इस हफ्ते में आई नहीं हो?
मैं- हाँ समय नहीं मिल पा रहा है.
अमित- आज आ जाओ ना.. मैं अकेला हूँ और मेरी जान बस 15 मिनट लगेगा.
मैं- ठीक है थोड़ी देर बाद आऊँगी लेकिन मैं 15 मिनट से ज्यादा नहीं रुकूँगी उतनी देर में ही मालिश करनी होगी.. और तुमने कसम खाई है उसका ख्याल रखना.
अमित- जो हुक्म जनाब आप आओ तो सही.

मैं थोड़ी देर बाद अमित के घर गई तो अमित ने मुझे देखा. मैं शार्ट टॉप और जीन्स पहने हुई थी. उसने कहा- आज काफी सिंपल लग रही हो?
मैंने उसकी बात पर कुछ नहीं कहा और कहा- जिस काम के लिए बुलाया है वो करो.. फिर मुझे कोचिंग जाना है.
अमित ने कहा- ठीक है आओ बैठो और जल्दी से अपने कपड़े निकालो.
मैंने कपड़े निकाल दिए. उसने बेड पर मुझे लिटा दिया और वही क्रीम निकाल कर लगा दी और मालिश करने लगा. उसने 15 मिनट मालिश की होगी.
फिर कहा कि पेट के बल लेट जाओ.

मैं वैसे लेट गई तो उसने दूसरी क्रीम निकाली और मेरी जाँघों से लेकर दोनों चूतड़ों में लगा दी और चूतड़ों को दबा दबा कर मालिश करने लगा. वो मालिश कर रहा था तो जैसे मेरी सारी थकान उतर गई.
उसने कहा- हो गया.. उठ जाओ और कपड़े पहन लो.

मैं उठी और कपड़े पहन लिए, मुझे ये मालिश काफी अच्छी लगी तो मैंने कहा- जब फिर मालिश के लिए आना होगा, तो एसएमएस कर देना.
मैं चलने लगी तो उसने मुझे गले लगाया और एक किस की.

इसके बाद मैं हर 2-3 दिन जाने लगी और वो ऐसे ही मालिश करता रहा. अब धीरे धीरे मेरी चूचियां कसी कसी टाइट टाइट रहने लगी थीं और कुछ बड़ी भी हो गई थीं. अब मेरे चूतड़ और चूचे जैसे पहले बिना ब्रा के भी काफी कसे कसे रहते थे.. उसी तरह रहने लगे थे. तब मुझे पता चला कि ये चूचे टाइट करने की क्रीम है.

धीरे धीरे समय बीतता गया और करीब 3 महीने बीत गए थे. मैं हर 2-3 दिन में अमित से मालिश करवा रही थी. इस बीच में उसने और कुछ किया भी नहीं ना मैंने कहा.

फिर एक दिन शाम को 7 बजे अमित की कॉल आई- यार मिनी एक बहुत जरूरी काम है.. करोगी?
मैं- हां कर दूंगी बताओ क्या काम है?
अमित- यार तुम्हारे घर के पास एक होटल है.. उसने होटल का नाम बताया और रूम नंबर बताया और कहा कि यहाँ जाकर 20 हजार रूपये ले आओ बस.
मैं- ठीक है. ये होटल तो यहीं है 5 मिनट की दूरी पर.. मैं अभी जा रही हूँ.
अमित- सुनो और फुल मेकअप करके जाना और जो मिनी स्कर्ट और बारीक वाला टॉप अवी ने दिया था वो पहन लेना और उसी की ब्रा पैंटी, सैंडल घड़ी जो भी है, पहन लेना.
मैं- ऐसा क्यों?

अमित- अरे यार वो बाहर के लोग हैं ना तो तुम उनके सामने अच्छी लगो.. बस मैं ये कहना चाहता हूँ. और हाँ वहां अपना नाम मिनी मत बताना शालू बताना.
मैं- ठीक है मैं पूरी तैयार हो कर जाऊँगी लेकिन अपना नाम शालू क्यों बताउंगी?
अमित- अरे जो रूपये आए हैं वो केवल शालू को ही मिलेंगे, वो मेरी असिस्टेंट है ना. इस वक्त वो घर जा चुकी है और अब वो आ नहीं पाएगी, इसलिए अगर तुमने मिनी बता दिया तो रूपये नहीं देंगे.
मैं- अच्छा ठीक है फिर मैं तैयार हो लूँ?
अमित- सुपर सेक्सी बन कर जाना ओके बाय.
उसने फिर से रूम नंबर और होटल नाम बताया.

मैं तैयार होने लगी तो दिव्या ने पूछा- कहां जा रही हो?
मैंने बता दिया जो अमित ने कहा था. दिव्या ने कहा- ठीक है.. जाओ.

मैं उसी ड्रेस में पूरी तरह से तैयार होकर घर से निकली. अब मेरे चूचे काफी बड़े हो गए थे और खूब टाइट टाइट थे. साइज़ में भी 35 से 36 के बीच हो गए थे. मेरी कमर 24 थी और नीचे भी गांड की पहाड़ी 35 या 36 साइज़ की हो गई थी. मैं अब पहले से और ज्यादा मस्त लगने लगी थी.

पांच मिनट बाद मैं होटल पहुँच गई और रूम की जानकारी ली कि किस फ्लोर पर है. मैंने अपना नाम शालू बताया तो उसने रूम से बात की और मुझसे कहा कि वो आपका ही इंतजार कर रहे हैं.. जाएं.

मैं लिफ्ट से रूम के बाहर पहुँच गई. बेल बजाई तो अन्दर से किसी ने पूछा कि कौन?
मैंने कहा- शालू!

दरवाजा खुला तो मैंने देखा कि अन्दर एक लड़का था जिसकी उम्र 25-26 साल रही होगी. उसने मुझे अन्दर बुलाया और कॉफ़ी ऑफ़र की. मैं बैठ गई और कॉफ़ी पीने लगी, वो मुझसे बातें कर रहा था और मुझे बड़े गौर से देख रहा था.

इसके बाद उसने कहा- जरा वो लिफाफा उठाइये.

लिफाफा वहां से कुछ दूर मेज पर था मैं उठ कर उसे लेने के लिए गई और ले कर वापस आकर बैठ गई.
वो मुझे उठने से बैठने तक बड़े गौर से देख रहा था, इसके बाद कहा- इसमें पैसे हैं शालू गिन के रख लो.

मैंने पैसे गिने और चलने की इजाजत मांगी तो वो बाहर तक छोड़ने आया. मैं घर आ गई और अमित को बताया कि पैसे मिल गए हैं कल ले लेना.
अमित ने कहा कि तुम ठीक से रख लो, मैं दो तीन दिन में आकर ले लूँगा.

यूं ही 5-6 दिन बीतने के बाद अमित ने मुझे कॉल किया.
अमित- मिनी, एक काम था हो जाएगा?
मैं- हाँ हो जाएगा क्या है बताओ?
अमित- पहले वादा करो कि मना नहीं करोगी.. तब बताऊंगा?
मैं- पहले बताओ तो यार क्या काम है.
अमित- नहीं पहले हाँ करो.

मैं- ठीक हैं मना नहीं करूँगी, अब बताओ क्या काम है?
अमित- तुम्हारे लिए जॉब है, कर लो काफी अच्छी है. मैंने उसमें तुम्हारे लिए हां भी कर दी है.
मैं- क्या जॉब है? अभी मेरे एग्जाम हैं?
अमित- बस 15-20 दिन ही काम है बाकी तुम फिर पढ़ाई कर लेना और एक दिन का 5 हजार मिलेगा, जो कम नहीं होता है.. है ना सही बात?
मैं- अच्छा ठीक है यदि 15 दिन का काम है तो इतने दिन कर लूँगी. पर काम क्या है मुझे क्या करना होगा.. बताओ?
अमित- तुम्हें 15-20 दिन तक एक लड़के की गर्लफ्रेंड होने का नाटक करना है बस.. और इसमें तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी, मुझे पता है.
मैं- अरे नहीं, अवी है.. वो नहीं इजाजत देगा.. तुम दिव्या को करने को कह दो.

अमित- अरे मैंने तुम दोनों के फोटो दिखाए थे, उसने तुम्हें पसंद किया है और अवी को पता है इस बारे में उसने भी हाँ कह दी है.
मैं- फिर भी उसने मुझसे नहीं कहा है. पहले वो मुझसे कहे, तो मैं राजी हो जाऊँगी ओके.
अमित- ठीक है फिर अभी अवी तुम्हें कॉल करके बताएगा, फिर मैं बात करता हूँ.

फिर कुछ देर बाद अवी की कॉल आई और उसने बताया कि मुझे पता है और तुम अमित का काम कर दो. मुझे कोई परेशानी नहीं है.
मैंने अमित को एसएमएस किया- हाँ अमित, अवी ने हाँ कहा है अब बताओ मुझे क्या कब और कैसे करना है?
अमित- एक लड़का है सैम तुम्हें उसकी गर्लफ्रेंड 15-20 दिन के लिए बनना है बस.
मैं- कौन है ये.. और कब से करना होगा.. कब तक और कुछ गलत सलत तो नहीं करना होगा?
अमित- नहीं मिनी असल में उसके पापा ने जिद की है कि तू शादी कर ले तो उसने कहा है कि उसकी एक गर्लफ्रेंड है, जिसे वह प्यार करता है और उसी से शादी करेगा और उसकी अभी पढ़ाई पूरी नहीं हुई है. पूरी होने पर वह उसी से शादी करेगा तो वही तुझे अपने पापा से मिलवाएगा बस.. जैसे ही उसके पापा फिर वापस चले जाएंगे, तुम आजाद हो जाओगी.
मैं- ठीक है कौन है और कब से करना है ये नाटक?
अमित- आज से 3 दिन बाद से और जो तुम्हें होटल में मिला था, उसी से और उसे तुम अपना नाम शालू ही बताना है. वो जो पैसे मिले है वो इस काम को करने के तुम्हारे ही हैं.. बाकी वो धीरे धीरे दे देगा.
मैं- उससे ही.. ठीक है जब करना होगा तो बता देना ओके.

फिर दो तीन दिन बाद अमित ने कॉल किया- कहाँ हो मिनी तुम्हें अपना काम याद है ना?
मैं- हाँ याद है बताओ कब और कहां उनके पापा से मिलना है?
अमित- हाँ वही बताने के लिए कॉल किया है. तुम अपना सारा सामान जो जरूरी हो एक दिन कहीं रुकने के लिए ले लो.. मतलब एक सूट ले लो और उसी होटल के उसी रूम में चली जाओ. आगे से वही तुम्हें सब बताएगा कि क्या और कैसे करना है. हां जो कहे वो करना ठीक है. अगर कोई परेशानी हो तो मुझे या अवी को कॉल कर लेना और अपना नाम शालू ही बताना क्योंकि उसकी गर्लफ्रेंड का नाम शालू ही है ओके बाय.

अमित ने इतना बताने के बाद कॉल रख दी. मैं सिंपल सा जीन्स टॉप पहन कर तैयार हुई और उसी तरह का एक और लेकर चल दी. मैंने सोचा कि इसके पापा से मिलना है, तो वही गांव में जो पहने जाते हैं जीन्स टॉप.. वही ले लूँ ताकि उसके पापा मुझे शरीफ समझें.

कुछ देर बाद मैं उसी रूम में पहुँच गई और डोरबेल बजाई तो उसी लड़के ने दरवाजा खोला और अन्दर आने को कहा.
सैम- मेरा नाम सैम है और तुम काफी अच्छी लग रही हो.
मैं- थैंक्यू मेरा नाम शालू है.
सैम- मिलकर अच्छा लगा.
मैं- मुझे भी.

सैम- तो शालू तुम्हें अगले 20 दिन तक मेरी गर्लफ्रेंड बनके रहना है बस और ऐसे करते मुझे अच्छा तो नहीं लग रहा है. पर मैं मजबूर हूँ तो सो सॉरी इसीलिए मैंने अमित और अवी से कहा था कि मुझे कोई अच्छी एक्टिंग करने वाली लड़की 20 दिन के लिए दिला दो उनकी गर्लफ्रेंड बिजी थीं तो उन्होंने मना कर दिया. नहीं तो उन्ही में से मैंने किसी को कहा था कि जो ज्यादा अच्छी हो. उन्हें मुझ पर भरोसा भी है कि मैं कुछ.. समझ रही हो ना.. चलो तुम आई शालू इसके लिए थैंक्यू.
मैं- ठीक है कोई बात नहीं.

सैम- ठीक है, तुम्हें अब यही उतने दिन रहना है जितने दिन पापा यहाँ रुकेंगे बस.
उसने अन्दर एक रूम दिखाते हुए कहा कि ये मेरा रूम है, जाओ और तैयार हो जाओ. अभी पापा को रिसीव करने एयरपोर्ट चलना है.
मैं- मैं तैयार हूँ चलो!
सैम- अरे शालू ये बैग तो रख दो और रूम देख लो.. दोनों देख लो ताकि पापा को ये ना लगे कि तुम नई नई हो.
मैंने जाकर अपने कपड़े वहां रखे और दोनों कमरे और बाल्कनी सब कुछ देख लिया.
मैंने सैम से कहा- चलो.

हम दोनों एयरपोर्ट चले गए. वहां कुछ देर इंतजार के बाद उसके पापा आ गए, उसके पापा ने उसे गले लगाया और पूछा कि वो बदमाश कहां है?
सैम ने मेरी तरफ इशारा किया तो मैं जाकर उनके पैर छुए उन्होंने कहा- सदा खुश रहो.. कभी मुझे याद नहीं करती हो? कभी कभी बात ही कर लिया करो.
मैंने कहा- ठीक है पापा जी, अब हम होटल चलते हैं.

फिर हम होटल आ गए. पहले पूरे दिन उसके पापा मुझसे बातें करते रहे, सब कुछ पूछते रहे.

मैं अपने रियल नाम को छोड़ कर सब बताती रही. दूसरा दिन भी ऐसे बीत गया. अब मेरे पास तीसरी ड्रेस नहीं थी और उसके पापा मुझे बाहर नहीं जाने दे रहे थे.
मैंने सैम से कहा तो वो बाहर से 4 सिम्पल सी ड्रेस खरीद कर ले आया. रात को मैं अकेले सोती थी. सैम अपने पापा के कमरे में.. क्योंकि सैम ने अपने पापा को बताया था कि वो उसे छूता भी नहीं है.

इसी तरह 5 दिन बीत गए. मुझे इसी माहौल में रोज की तरह रहने की सी आदत पड़ गई.

एक दिन अमित के पापा को किसी ने कॉल किया और कहा कि आप सैम को लेकर जल्दी से गोवा आ जाईये, यहाँ उसकी मम्मी बीमार हो गई हैं.
मैं इधर अकेली बच रही थी तो उसके पापा ने कहा कि तुम भी अपने एक जोड़ कपड़े रख लो, आज चली चलो, कल वापस चली आना.

उन्होंने एयरपोर्ट कॉल करके तीन टिकट करवा दिए. शालू का पहचान पत्र सैम ने मुझे दे दिया और फिर हम गोवा के लिए निकल पड़े. पहली बार मैंने प्लेन में बैठ कर सफर किया था तो मुझे बहुत अच्छा लगा.

फिर हम गोवा पहुँच गए, उसी दिन मेरी भैया से बात हुई तो उनकी जॉब बंगलौर में किसी कम्पनी में लग गई थी.

इसके बाद जहां सैम की मम्मी रुकी थीं, हम लोग उस होटल में गए और मैं उनसे मिली. उन्होंने भी मेरी बहुत तारीफ की और मुझसे कहा कि तुम अब मेरे साथ न्यूयार्क चलोगी.

उनकी पूरी फैमली वहीं रहती थी. सैम भी एक साल पहले आया था. अमित जिस कम्पनी में काम करता था, वो उसी की थी.. और वो अपनी कम्पनी ही देखने इंडिया आया था. इसीलिए किसी को जानता नहीं था. शालू उसकी गर्लफ्रेंड थी लेकिन वह किसी और के साथ रहने लगी थी.
मैंने कहा- नहीं मम्मी मेरे एग्जाम हैं, मैं बाद में आऊँगी.

फिर हम आपस में बात करते रहे और उनकी कम्पनी को देखने गए, जहां एक प्रोजेक्ट चल रहा था.

उन्होंने कहा- सैम, अब इसे तुम देख लेना जो 2-3 दिन लगें.. फिर वापस आ जाना लेकिन पहले शालू को दिल्ली छोड़ आना, ये नहीं कि यहीं से बैठा दो और कहो अकेली चली जाओ. और मैं वीजा के लिए देखो कल जाकर आवेदन कर दूंगी, एग्जाम बाद आने की तैयारी कर लेना और वहां तुमको पूरा एक महीने रुकना है. मैं कुछ नहीं सुनूंगी.

इसके बाद अगले दिन उसके मम्मी पापा चले गए और हम उसी होटल में रुक गए ताकि दूसरे दिन उसका प्रोजेक्ट पूरा हो जाए. मैं जो शाम को सोने के समय कपड़े लाई थी, वो पहन के सो गई. क्योंकि जो पहन कर आई थी वो गंदे हो गए थे और सोने से वो भी ख़राब हो गए.

मैं वही पहने रही. सैम अपने काम से चला गया और थोड़ी देर बाद आ गया. उसने कहा- शालू अब यहाँ आई हो तो क्यों ना गोवा देख लो घूम लो. फिर न जाने कब आओ.
मैंने कहा- ठीक है, लेकिन मेरे पास पहनने के लिए कपड़े नहीं हैं.
सैम ने कहा- ये कौन सी बड़ी बात है, मैं अभी मंगवा देता हूँ.

उसने अपनी एक महिला कर्मचारी को फोन किया और कहा कि तुमने कल मैडम को देखा था कि नहीं..?
मैंने उधर की आवाज नहीं सुनी, सैम ने कहा- हां वही.. तो तुम कैशियर से मेरी बात करवा कर जितने रूपये लगें ले लो, और उनके लिए 10-12 ड्रेस ले आओ उन्हें पूरा गोवा देखना है और एक गाड़ी की भी कह देना कि भेज दे.
उधर से कुछ बात हुई जिस पर कुछ देर बाद फिर सैम ने कहा- हाँ वहां भी जाएंगी, सभी जगह जाएंगी, हाँ यहाँ जो पहने जाते हैं, उनमें सबसे अच्छे वाले लाना, चाहे जितने महंगे हो ओके.
फिर सैम ने मुझसे पूछा कि शालू तुम्हें किस साइज़ के कपड़े होते हैं?
मैंने कहा- एक्सएल हों या डबल एक्सएल हों.. ठीक फिट हो जाते हैं.
यही सैम ने उधर बता दिया और कहा कि 2 घंटे में मेरे रूम में पहुँचा देना.

फिर सैम अपने किसी दोस्त से मिलने चला गया.

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कहानी जारी है.
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