मेरी सहेली की मम्मी की चुत चुदाइयों की दास्तान-5

(Meri Saheli Ki Mammi Ki Chut Chudaiyon Ki Dastan- Part 5)

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ऑटो ड्राईवर और दो लड़कों से चुत चुदाई के बाद जब मैं घर पहुँची तो मेरा शौहर दोस्तों से मिलकर आ चुका था और लेट नाईट टीवी देखते हुए शराब पी रहा था।
मैंने भी कपड़े बदल कर गाउन पहना, फिर एक पैग बनाया और शौहर के साथ बैठ कर पीने लगी।
सारा बदन अभी भी दुःख रहा था।
मेरा शौहर सोच भी नहीं सकता था कि उसकी जोरू अभी आधे घंटे पहले तीन तीन मर्दों से रंडी बनी चुत चुदाई करवा रही थी।

‘कहाँ गईं थीं। इतनी शाम को शहनाज़?’ उन्होंने मेरी तरफ देखकर पूछा।
‘बाज़ार से सब्जी लेने गई थी।’
‘सब्जी लेने में इतना टाइम लगता है। अभी तेरा यह हाल है मेरे पीछे में तो तू क्या रंडीखाना मचाती होगी… खैर ठीक है, इसको थोड़ा ऊपर कर न…’ सवाल करते हुए चार-पाँच मिनट के बाद शौहर अल्ताफ़ शराब पीते-पीते ही मेरी सफ़ेद गाउन के ऊपर से मेरे मम्मे दबाने लगा।

मैं दिल ही दिल में डर गई थी, मेरे घुटने छिले हुए थे चूचियों पर नोचने खसोटने के लाल निशान थे।

‘थोड़ा सहलाओ इसको!’ और फिर उसने बरमूडा से अपनी लुल्ली बाहर निकाल कर मेरा हाथ उस पे रख दिया। मेरे एक हाथ में शराब का पैग था, एक हाथ से मैं उसे सहलाने लगी तो लुल्ली अकड़ कर करीब चार इंच की हो गई।

‘शहनाज़ मुँह में ले इसको!’ फिर हमेशा की तरह उसने मुझे इशारे से उसे चूसने को कहा।
मैंने अपना शराब का गिलास खाली किया और सोफे से उतर कर नीचे बैठ गई। फिर झुक कर उसकी लुल्ली अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… और जोर से चूस… तेरे लिप्स की रगड़ से मेरे लौड़े में आग सी लग जाती है।’

मुझे लगा कि आज मेरा शौहर मुझे रात भर जमकर रगड़ेगा लेकिन एक मिनट भी नहीं हुआ था कि उसकी लुल्ली ने अपना पानी फ़च्छ फ़च्छ करते हुए मेरे मुँह में छोड़ दिया।
अल्ताफ़ हाँफ रहा था लेकिन मैं शायद आज ज्यादा बेचैन थी।

‘चोद न मादरचोद…’ उसका पानी गट गट हुए मैं सोच रही थी। मुझे उम्मीद तो नहीं थी पर फिर भी मैंने शौहर की तरफ इल्तज़ा भरी नज़रों से देखा।
‘चल जाकर सो जा!’ उसने मुझे झिड़क दिया।

‘नामर्द साला… वापस ही क्यों आया, वहीं मर जाता।’ मैंने दिल ही दिल में उसे गाली दी। होंठों को हाथ से ही साफ किया और अपने लिये दूसरा पैग बना कर अंदर दूसरे कमरे में चली गई।

मैं खिड़की के पास बैठी शराब की चुस्कियाँ लेने लगी तो मुझे वो ब्लू फिल्म याद आ गई। जो मुझे कॉलेज की प्रिंसपल मैडम डेलना ने दी थी।
मैंने तुरंत vcd on कर दी। अजीब से लंड थे उन गोरे लड़कों के उस फिल्म में जो एक पाकिस्तानी लड़की पोर्न स्टार नादिया अली को चोद रहे थे।

अचानक मेरा ज़हन लंड की बनावट पर गया जो मेरे शौहर से बिल्कुल अलग थी। उफ़्फ़… यह तो अजीब सा लंड था फिल्म में, जिस पर चमड़ी थी रोशन के लंड की तरह!

मेरी चुत बेहद गीली हो गई थी। मैं गाउन में हाथ डाले चुत को मसलती हुई वासना की आग में तड़पती हुई सो गई।

अगले दिन से मैंने कबीर को कोचिंग देना शुरू कर दी थी।
‘तुमको किसने बोला कि मैं कोचिंग पढ़ाती हूँ?’
‘मुझे रोशन ने बोला कि शहनाज़ मैडम बहुत अच्छे से देती हैं।’
‘क्या?!!’ मैं उसका इशारा समझ रहीं थीं लेकिन वह मेरा स्टूडेंट था और रोशन से छोटा भी था।
‘म… मेरा मतलब रोशन बोला था कि शहनाज़ मैडम बहुत अच्छे से कोचिंग देती हैं।’

‘हा हा हा… नॉटी।’ बरामदे में हम दोनों स्टडी टेबल पर अपनी अपनी कुर्सियों पर थे। वह मुझे चोदना चाहता था। मैं उस मासूम लड़के से चुदना चाहती थी तो हमारे बीच बहुत जल्दी सहमति बन गई।

‘मैडम आप उदास क्यों रहती हो, आपकी सेक्स लाइफ तो ठीक है न?’ उसने मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर पूछा।
‘क्या बताऊँ तुमको कबीर… जब वो रात को बिस्तर में आते हैं तो मेरे सभी अंगों को मसल डालते हैं और उनका गुस्सा देखकर तो मैं डर जाती हूँ इसलिए मैं कई महीनों से ढंग से चुदी ही नहीं हूँ। ऐसा समझो कि इस उम्र में भी कुंवारी की कुंवारी ही हूँ।’ मैंने उससे झूट बोला जबकि एक दिन पहले ही मेरी ज़बरदस्त अंसल प्लाज़ा के पार्क में चुदाई हुई थी।

‘क्या कह रही हो मैडम?’
‘हाँ कबीर… मैं सच कह रही हूँ… उनका लंड आज तक मेरी चुत में ठीक से गहराई तक गया ही नहीं… उन्होंने पहली बार आते ही मुझे नंगी करके अपने लंड को सीधे मेरी गांड में घुसा दिया था… जिससे दर्द के मारे मैं रोने लगी थी।’

‘आपको गांड मरवाना पसंद नहीं है क्या?’
‘वह बात नहीं है कबीर, मैं भारतीय औरतों की तरह गांड मरवाने में झिझकती नहीं हूँ लेकिन उनसे जब कुछ नहीं होता है तो मेरी गांड में डिल्डो घुसाने लगते हैं। मैं दर्द से बिलबिलाती रही तब भी उन्हें दया नहीं आई और उन्होंने डिल्डो से करारा धक्का मारने के लिए प्रयास किया तो मैंने उन्हें जोर का धक्का मार कर पलंग के नीचे गिरा दिया था। गांड में डिल्डो लिए दूसरे कमरे में भाग गई थी। उसके बाद मैंने उनसे एक बार भी चुदाई नहीं कराई।’

‘मैडम जी यह तो गलत बात है… देखो शौहर बीवी में ये बातें तो होती ही रहती हैं… प्यार से चुदाई कराओ और मजा लेकर जिंदगी का लुत्फ़ उठाओ।’
‘नहीं कबीर, मेरे शौहर का लंड आप देखोगे तब आप को मालूम पड़ेगा कि ऐसी लुल्ली देखकर तो रंडी भी मना कर देगी।’
‘अच्छा! तब तो सच में एक बार देखना ही पड़ेगा… वैसे उनका हथियार कितना बड़ा और कितना ताकतवर है?’

‘बहुत… छोटा बच्चों की जैसा, एकदम नूनी लेकिन तू तो जवान है तेरी तो गर्लफ्रेंड तो खुश रहती होगी?’
‘नहीं मैडम। गर्लफ्रेंड होती तो आपको थोड़ी लाइन मारता? आपके बारे में एक बात सुनी है आप बुरा तो नहीं मानोगी?’
‘अरे! नहीं बोल न?’
‘आपके शौहर के ही दो दोस्तों ने आपको जमकर चोदा है।’

‘हाँ हा हा… शैतान… ज़रूर रोशन ने बोला होगा। दरअसल जब मेरे शौहर यहीं इंडिया में थे तो वह लोग घर पर आते थे इनके साथ शराब पीने को। यह तो दुबई चले गए वह लोग आते रहे। बस एक दिन मैंने भी बहुत पी रखी थी तो नशे में ‘भाभी प्लीज़… भाभी प्लीज़…’ करते करते उन्होंने पकड़ लिया तो मैं भी न नुकुर करते हुए पिघल गई थी।’

‘वाह मैडम, आप तो बहुत सेक्सी हो कॉलेज में सब आपको बहुत शरीफ औरत समझते हैं। तो क्या करते थे वो दोस्त आपके साथ?’
‘किसी के साथ सेक्स करने से मेरे शरीफ होने न होना का क्या ताल्लुक? यह मेरा निजी मामला है। हम भारतीय लोगों की सोच भी न…’

‘हा हा हा… सही बात, हम बचपन से ऐसे माहौल में रहते हैं कि पराये मर्द के साथ सेक्स को ग़लत मानने लगते हैं। भला किसी के साथ सहमति से सेक्स कर लेने से रिश्ते कैसे ख़राब हो सकते हैं। घटिया सोच है लोगों की।’

‘बिल्कुल सही, रिश्तों में नयापन लाने के लिए आजकल की नई पीढ़ी वाइफ स्वैपिंग काफी पसंद करती है। एक लड़का, एक लड़की एक छत के नीचे रहते हुए एक चुत के लिए तरस रहा है और एक लंड के लिए तड़पे… यह कैसी सोच है। विदेशो में बहन का पहला सेक्स पार्टनर उसका भाई ही होता है। और इससे परिवार में रिश्ते और गहरे होते हैं, प्यार बढ़ता है न कि घटता है।’

‘सही बात है, आखिर बहन बाहर भी तो किसी से चुदेगी ही फिर भाई क्यों नहीं? सुरक्षित भी और आसान भी!’
‘बिल्कुल, अगर बहन के साथ करने में झिझक है तो किसी दोस्त से खुलकर बात करो और सिस्टर स्वैपिंग कर लो।’
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‘वाह मैडम, मान गए… आप तो अल्ट्रा मॉर्डन हो, घरेलू औरत शौहर के रहते हुए ग्रुप सेक्स करे, यह अभी अपने यहाँ बहुत आम नहीं हुआ है। वैसे आप लोग क्या पसंद करते हो लाइक वुमन ऑन टॉप?’

‘वैसे उनको तो बस मेरी गांड मारने में ही मजा आता है। कभी तो हम तीनों कई मिनट तक एक दूसरे का चूसते रहते हैं। मजा तो तब और दुगना हो जाता है… जब एक मेरे पीछे डाल कर चुदाई करता है, और एक आगे से! मैं दोनों के बीच फंसी रहती हूँ। लेकिन गांड मरवा कर कब तक गुज़ारा करूँ, चुत की आग सोने नहीं देती है।’

‘मैडम दर्द नहीं होता क्या? रोशन बता रहा था कि आपको गांड मरवाने में दर्द बहुत हो रहा था?’
‘उफ्फ उसने तुझे यह भी बता दिया। अरे यार, अचानक उसने वाशरूम में पकड़ लिया था। इसलिए खड़ी थी न, इसलिए होता है शुरू शुरू में… जब लंड जगह बना लेता है… तो चुत से ज्यादा मजा गांड मराने में मजा आता है। लेकिन चुत की चुदाई के बिना कैसा मजा?’

इस तरह की बातें करते करते मैं विचलित होने लगी, मुझे लगा कि ज्यादा और बातें हुई तो मैं झड़ने लगूंगी। अब मैंने कुर्सी पर बैठे हुए ही अपने पैर फैला दिए।

तभी उसने अपना हाथ आगे से खुले गाउन को खिसका दिया, अब वो मेरी गोरी जाँघों में अपने हाथ फेरने लगा।
मैं उसको मुस्कुराते हुए देख रही थी। धीरे धीरे उसने मेरी चड्डी को सरकाते हुए चुत के पास उंगली को लगा दिया और मेरी चुत को सहलाने लगा।
मैंने कुछ दिन पहले ही वीट से चुत की शेव की थी, चुत पर हल्के बाल थे।

उसने फिर उसने मुझे बांहों में भर लिया और मेरी दोनों चूचियों को दबा दिया। मैं उससे दिखावटी नाराज होने लगी। मैं अपनी कुर्सी सरकाकर उसके करीब आ गई थी।
वो बोला- मैडम बहुत मजा आएगा… मौसम भी साथ दे रहा है… मजा ले लो।
मैं चुप थी…

कबीर ने अपनी पैंट की ज़िप खोली और अपना लंड मुझे हाथ में पकड़ा दिया।
उसका लौड़ा पहले ढीला था… फिर धीरे धीरे एकदम से सख़्त हो गया।
मेरा मन उसका लंड लेने को हो गया… लेकिन मेरे शौहर कमरे में बैठे ड्रिंक कर रहे थे।

उसने मेरी ब्रा को पीछे से खोल दिया, अपने हाथ उसने मेरे गाउन में डाल कर मेरे चूचों को दबाने लगा।
मैं मादकता से सिसकार कर रह गई, मुझे अब अच्छा लगने लगा था, मैं चुदास के चलते उसके साथ सेक्स का खेल खेलने लगी थी।
मैंने उसकी पैन्ट को खोल दिया, अब उसका लंड एकदम तन गया था और मेरी चुत में घुसने को बेताब था।

‘आराम से आराम से… वे अन्दर ही हैं…’ उसने मेरा गाउन आगे से खोल कर मुझे नंगी कर दिया और मेरे तन बदन को चूमने लगा।
कुछ ही देर में मेरी नंगी चुत पानी छोड़ने लगी, मेरा मन उससे चुदवाने के लिए तैयार था।

‘आआहह्ह… अन्दर मेरे शौहर अल्ताफ हैं, यहाँ यह सब ठीक नहीं है।’ मैं कमरे की तरफ झांकते हुए सिसकार उठी।
‘मैडम आप बोलो तो बाहर किसी होटल में चलें?’ उसने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा।
‘बाहर कहाँ? होटल में किसी ने मुझे देख लिया तो? रेड पड़ गई तो रंडी कहलाऊँगी। वैसे भी मैं तुमसे बहुत बड़ी हूँ, क्या बोलूंगी होटल में कौन हो तुम मेरे?’

‘आप अपना लॉन्ग कोट पहन लेना, मैं हेलमेट लगा लूँगा, एक दोस्त है अकेला ही रहता है, उसके घर चलते हैं।’ कबीर का जवाब सुन कर मैं तैयार होने को बढ़ गई।

‘अल्ताफ़, मैं शॉपिंग के लिए जा रही हूँ। कबीर मुझे मर्केट तक छोड़ देगा, लेट हुई तो वहाँ से रिक्शा लेकर आ जाऊँगी। तुम्हारे लिए कुछ लाना है?’
‘बियर चाहिए जो तू नहीं ला पायेगी, जा अपना काम कर…’

‘मेरी बिना इन्सल्ट किये इस कुत्ते का दिल ही नहीं भरता!’ सोचते हुए मैं फटाफट तैयार होकर अपने स्टूडेंट कबीर के साथ निकल गई। मैंने लॉन्ग कोट के नीचे एक क्लब वियर टाइप रेड कलर की स्पघेटी (spaghetti) पहनी हुई थी।

कुछ ही देर में हम उसके एक दोस्त नदीम के घर में थे।

कहानी जारी रहेगी।
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