बहन का लौड़ा -36

(Bahan Ka Lauda-36)

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अब तक आपने पढ़ा..

रोमा वासना के भंवर में फँस गई थी.. अब बस हर हाल में उसको मज़ा लेना था। वो नादानी में ‘हाँ’ कह गई और नीरज अपने मकसद में कामयाब हो गया।
नीरज ने दोनों हाथों से चूत को फैलाया और लौड़े पर अच्छे से थूक लगा कर चूत में सुपाड़ा फँसा दिया और हल्का झटका मारा।
रोमा- आआआ एयाया.. ये क्या आह्ह.. कर दिया.. पूरा घुसा दिया आह्ह..

रोमा हिल ना पाए.. इसलिए नीरज उसके ऊपर चढ़ गया.. उसके हाथ पकड़ लिए और उसके निप्पल चूसने लगा।
नीरज- पूरा कहाँ जान.. बस सुपाड़ा चूत में घुसाया है।
रोमा- तो इतना दर्द क्यों हो रहा है.. आह्ह.. मुझे आह्ह.. प्लीज़ निकाल लो ना..
नीरज- ठीक है निकाल लेता हूँ.. मगर बस एक बार ‘हाँ’ कह दो.. मैं लौड़े को थोड़ा झटका मारना चाहता हूँ.. उसके बाद निकाल लूँगा..
रोमा- आह्ह.. बहुत दर्द होगा ना मुझे.. आह्ह.. मगर आप को नाराज़ नहीं करूँगी.. आह्ह.. मार लो..

नीरज ने कमर पर दबाव बनाया और ज़ोर से झटका मारा.. आधा लंड चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया और झटके के साथ ही उसने रोमा के होंठ अपने होंठों में दबा लिए।
रोमा इतनी ज़ोर से चीखी.. मगर उसकी आवाज़ मुँह में ही दफ़न हो गई..

अब आगे..

रोमा की आँखों से आँसू आने लगे.. उसका बदन अकड़ सा गया.. सारा मज़ा फुर्र हो गया..

नीरज काफ़ी देर तक आधे लौड़े को आगे-पीछे करता रहा.. रोमा ‘गूं.. गूं..’ करती रही.. मगर अब नीरज पीछे हटने वाला नहीं था। वो बस रोमा की चुदाई करता रहा। काफ़ी देर बाद उसको लगा अब रोमा शान्त है और चिल्ला नहीं रही.. तो वो रुक गया और अपने होंठ हटा दिए।

रोमा- उउउ तुम बहुत गंदे हो.. आह्ह.. मेरी मर्ज़ी के बिना मेरी चूत फाड़ दी.. आह उउउह.. तुम्हें कभी माफ़ नहीं करूँगी मैं.. उउउहह..
नीरज- अरे रो मत मेरी जान.. तुमने कहा था ना.. झटका मार दो.. तभी मैंने मारा.. अब आधा लौड़ा घुस गया है.. सील टूट गई है.. अब चुदाई का असीम आनन्द लो.. रोती क्यों हो तुम.. अब तो असली मज़ा आएगा..
रोमा- मुझे पता था.. तुम आज चोदे बिना नहीं मानोगे.. आह्ह.. मगर इतना दर्द होगा.. ये नहीं सोचा था.. आह्ह.. अब हटो..
नीरज- अरे जान.. प्लीज़ जो दर्द होना था हो गया.. अब अधूरी चुदाई में क्या मज़ा प्लीज़.. अब थोड़ी देर साथ दे दो..

रोमा को लगा अब दर्द कम है और चुदाई का मज़ा लेने में क्या बुराई है.. तो उसने नीरज को ‘हाँ’ कह दी।
अब नीरज आधे लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगा.. रोमा को दर्द के साथ मज़ा भी आ रहा था.. तो अब वो भी मज़े लेने लगी..
रोमा- आह्ह.. आई.. जानू आह्ह.. उंगली से आह्ह.. ज़्यादा लंड से मज़ा आ रहा है.. आह उई चोदो आह्ह.. आई…

नीरज- मेरी जान अब थोड़ा सा दर्द और होगा.. बस उसके बाद तुम हमेशा के लिए दर्द मुक्त हो जाओगी.. आह्ह.. पूरा घुसा रहा हूँ.. उसके बाद मज़े ही मज़े हैं।
रोमा- आह आईईइ.. अब जब आह आधा लौड़ा आह्ह.. इतना मज़ा दे रहा है.. तो आह्ह.. पूरा घुसा दो.. मैं दाँत भींच रही हूँ.. आह्ह.. घुसा दो आह्ह..

नीरज ने कमर को पीछे किया और ‘घाप’ से लौड़ा चूत की गहराई में घुसा दिया.. रोमा ना चाहते हुए भी चीख पड़ी।
रोमा- आह जानू नहीं आआह्ह.. मर गई रे आह.. मम्मी आह उईईइ..
नीरज अब स्पीड से लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा ताकि जल्दी से चूत में सैट हो जाए और रोमा का दर्द कम हो।

दस मिनट तक रोमा चीखती-चिल्लाती रही और नीरज चुदाई में लगा रहा और साथ ही साथ रोमा के मम्मों को चूसता रहा।
रोमा- आ आह्ह.. नीरज आह्ह.. मेरे जानू आह्ह.. अब थोड़ा दर्द कम हुआ आह्ह.. आई.. मेरी चूत में.. आह्ह.. अब गुदगुदी शुरू हो गई है.. आह्ह.. ज़ोर से करो आह्ह..

नीरज- उहह उहह.. मेरी जान आह्ह.. तुम झड़ने वाली हो.. आह्ह.. मेरा भी कंट्रोल नहीं हो रहा.. आह्ह.. बस आ गया.. आह्ह.. ले उहह.. उहह..

नीरज के लौड़े से वीर्य की पिचकारी रोमा की चूत में जब गई.. उसके गर्म अहसास से रोमा की चूत भी बहने लगी। अब दोनों ही मस्ती में झड़ने लगे थे।

जब नीरज अलग हुआ तो उसका लंड वीर्य और खून से सना हुआ था.. चादर भी खराब हो गई थी.. जिसे देख कर रोमा घबरा गई..
रोमा- ओह माँ.. ये क्या किया आपने.. मेरी चूत फाड़ दी.. उउउह.. देखो कितना खून निकला है.. उउउहह..

नीरज- अरे अरे जान.. रो मत.. कुछ नहीं हुआ.. बस सील टूटने पर ये खून आया है.. ये तो सगुन का लाल रंग है जान.. सच्ची.. कुछ नहीं हुआ..
रोमा को बहुत देर तक नीरज समझाता रहा.. जब जाकर उसकी समझ में बात आई और नीरज ने थोड़ी छेड़खानी भी उससे की.. कि वो कैसे लास्ट में गाण्ड उठा कर चुद रही थी।

रोमा- धत्त.. आप बहुत बेशर्म हो.. जाओ.. मुझे आपसे बात नहीं करनी।

नीरज- ठीक है मत करो बात.. मगर चुदवा तो लोगी ना..
रोमा- नहीं कभी नहीं.. तुम बहुत बदमाश हो..
रोमा जब उठने लगी.. उसको चूत में बहुत दर्द हुआ और उसके मुँह से हल्की चीख निकल गई।

नीरज- अरे मेरी जान.. अब तुम कुँवारी कली नहीं हो.. जो ऐसे उठ रही हो.. अब तो पका हुआ पपीता बन गई हो.. आज थोड़ा आराम से उठो.. उसके बाद तो तुम्हारी चाल ही बदल जाएगी।

रोमा- आह्ह.. मरवा दिया ना.. आह्ह.. अब घर कैसे जाऊँगी मैं आह्ह..
नीरज- अरे डर मत.. कुछ नहीं होगा.. बस थोड़ी देर दर्द होगा.. बाद में एकदम ठीक हो जाओगी..
नीरज ने रोमा को पकड़ कर बाथरूम तक जाने में मदद की..

रोमा के पैर ज़मीन पर बराबर नहीं टिक रहे थे.. उसको बहुत दर्द हो रहा था- आह्ह.. आपने तो मेरी हालत बिगाड़ दी.. अब आ घर कैसे जाऊँगी?

नीरज- अरे मैंने कहा ना.. कुछ नहीं होगा चलो.. मैं तुम्हें अन्दर ले जाता हूँ।
नीरज उसको अन्दर ले गया और बड़े प्यार से उसको बैठा दिया.. उसकी चूत को पानी से साफ करने लगा..

रोमा- आह्ह.. आराम से.. दर्द होता है.. उई तुम भी अपना लौड़ा साफ कर लो.. कैसे गंदा हो गया है..
नीरज- तो तुम ही कर दो ना.. मेरी जान.. देख क्या रही हो..

रोमा भी लौड़े को साफ करने लगी.. नीरज चूत को अच्छे से साफ कर रहा था। उंगली अन्दर तक घुसा कर चूत को साफ कर रहा था.. जिससे रोमा को दर्द के साथ मज़ा भी आ रहा था।

रोमा- आह्ह.. उई.. धीरे से मेरे जानू.. आह्ह.. उई.. आज तो मम्मी मेरी जान ले लेगी.. उनको पता चल जाएगा..
नीरज- एक तरीका है.. जिससे पूरा दर्द निकल जाएगा.. मगर तुम उस बात को मानोगी नहीं।
रोमा- मान लूँगी मेरे जानू.. तुम बताओ तो सही.. क्या तरीका है..?
नीरज- ठीक है.. बताता हूँ.. पहले तौलिया से अच्छे से चूत साफ कर लो..
रोमा- तुम बाहर जाओ.. मुझे बाथरूम करना है.. उसके बाद जो तरीका है.. बता देना..

नीरज उसकी बात मान कर बाहर आ जाता है और बिस्तर को ठीक करने लगता है.. उसके चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी थी और होगी क्यों नहीं.. कच्ची चूत को जो चोदा था उसने..।

दोस्तो, उम्मीद है कि आप को मेरी कहानी पसंद आ रही होगी.. मैं कहानी के अगले भाग में आपका इन्तजार करूँगी.. पढ़ना न भूलिएगा.. और हाँ आपके पत्रों का भी बेसब्री से इन्तजार है।
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