चाची के बदन का मज़ा

(Chachi ke badan ka Maza)

रीमा रॉय 2016-09-06 Comments

मेरा नाम रोहन है, मेरी उम्र 22 साल है और आज मैं आपके सामने अपनी एक सच्ची कहानी अन्तर्वासना के माध्यम से कहने जा रहा हूं।
बात उन दिनों की है जब मैं पढ़ता था, उन दिनों मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थी। अब मेरा सेक्स करने के बहुत मन करने लगा था पर तब तक मुझे कोई मौका नहीं मिल पाया था।

बहुत दिनों से मेरी नजर मेरी चचेरी चाची पर थी लेकिन तब तक कभी मैंने उनसे अपनी भावनाएँ अभिव्यक्त नहीं की थी

एक दिन मेरे एक दोस्त ने मुझे ब्लू फिल्म मोबाइल में दिखाई।
फिर क्या था, उस दिन मेरा लंड उफान मार रहा था और मैंने ठान लिया की आज तो चाहे कुछ भी हो जाए चाची को चोदना ही है।
चाची की उम्र लगभग 28 साल है, उनके दो बच्चे हैं एक की उम्र 7 और दूसरे की 9 साल के आस पास है, रंग सांवला, उभार का आकार मध्यम और गांड आकर्षक है।

मैं शहर में पढ़ता था तो जब भी उनको कुछ सामान मंगवाना रहता मुझसे ही बोलती थी, मैं भी ख़ुशी ख़ुशी उनका सामान ला देता था।

चाचा थोड़े दुबले हैं देखने में भी उतने ख़ास नहीं हैं और आए दिन उनकी तबियत को कुछ न कुछ हुआ रहता है।

चाची को देख कर लगता है कि चाचा उनको अच्छी तरह खुश नहीं कर पाते और वो प्यासी रह जाती है।

चाची का एक जीजा है जो हमेशा उनके यहाँ आता जाता रहता है, कभी कभी चाचा बाहर रहते हैं और वो पूरा दिन और रात चाची के साथ उनके कमरे में रहता है।

यह बात मेरे मन में कई दिनों से खटक रही थी और मैं हिम्मत करके उस दिन चाची को बोलना चाहता था कि मुझे भी थोड़ा रस पान करा दें।
मैं इतनी हिम्मत इसलिए भी कर पाया क्यूंकि मुझे उनके और उनके जीजा के बीच का सम्बन्ध ठीक नहीं लग रहा था और लगता था कि उनके और उनके जीजे के बीच शारीरिक सम्बन्ध है।
तो अगर वो नहीं मानती तो उन्हें ब्लैकमेल करने का यह अच्छा तरीका था।

उस दिन करीब दोपहर के 2 बज रहे थे, उनके घर में उनके अलावा और कोई नहीं था, दोनों बच्चे उनकी मासी के घर गए हुए थे और चाचा खेत गए थे।

मैं इसी मौके का इंतज़ार कर रहा था, उनका और हमारा घर पास में ही है। मैं उनके घर गया, दरवाजा खटखटाया।

उन्होंने दरवाजा नहीं खोला।
वो सो रही थी शायद!

फिर जब मैंने 2-3 बार खटखटाया तो उन्होंने दरवाजा खोला, उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोला, मैं अन्दर घुस गया और अन्दर से कुण्डी बंद करते हुए उनका हाथ पकड़ के उन्हें भी अन्दर खींचते हुए ले गया और दीवार से उनकी पिछवाड़े को टिकाते हुए उनसे सट कर खड़ा हो गया।

तब तक वो डर सी गई थी।

मेरी साँसें तेज हो गई थी, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ!
फिर धीरे से सांस लेते हुये मैंने अपने आप को थोड़ा शांत किया और उनसे कहा- आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं आपको जब भी देखता हूं उत्तेजित हो जाता हूँ यहां तक कि आप जब भी अपने कपड़े बाहर सुखाती हो मैं आपकी ब्रा में मुठ मारे बिना नहीं रह पाता। मैंने आज तक कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया है पर आज मेरा लंड उफान मार रहा है और मैं आपको जी भर कर चोदना चाहता हूँ प्लीज ना मत करना।

ये सारी बातें मैंने एक सांस में बोल दी थी। ऐसा बोलते हुए अचानक मेरा हाथ उनके उभारों के ऊपर आ गया और मैंने उनको बुरी तरह मसलना शुरू कर दिया था।
क्या करता, आज तक मैंने अपनी असल जिंदगी में कभी उभार दबाये नहीं थे।

मैं हैवानो की तरह उन्हें निचोड़ने लगा तब तड़क वो मेरा विरोध नहीं कर पाई थी, फिर जैसे ही मैंने चूमने के लिए अपने होंठ उनके होंठो पे रखना चाहा उन्होंने मुझे रोकते हुए मेरे हाथ अपने उरोजों से हटा दिए और कहा- ऐसा नहीं बोलते, मैं तुम्हारी चाची हूं और मुझसे तुम्हें ऐसी बातें नहीं करना चाहिए।

तो मैंने भी जवाब में कह दिया- जब आप अपने जीजा के साथ सोती हो तो यह नहीं सोचती क्या कि आप शादीशुदा हो और जो आप उनके साथ करती हो वो गलत है? फिर अब ये शब्द अचानक कैसे याद आ रहे हैं आपको?
यह बोलते हुए मैंने उनको चूमना शुरू कर दिया।

इस बार वो मुझे रोक नहीं पाई मैंने बहुत देर तक उनके होंठों को चूसा, मम्मों को ऊपर से ही मसलने लगा।
वो अपने आप को मुझसे छुड़ाने के लिए थोड़ी बहुत कोशिशें करने लगी पर नाकाम रहीं।
जब मैं उनको चूम रहा था तो मेरे हाथ उनके चूतड़ों को मसल रहे थे।

इतना सब होने के बाद मुझे अचानक याद आया कि मैं सेक्स की आग में भड़क के कहीं कुछ गलत न कर बैठूँ जिससे मुझे आगे जिंदगी भर पछताना पड़े, इसलिए मैंने उनको ढीला करते हुए छोड़ दिया।

तब तक मेरा लंड फुंकार मार रहा था, पता नहीं उस समय मैं अपने आप को कैसे रोक पाया।
फिर मैंने उनको धीरे से कहा- चाचि, मुझे माफ़ कर दो, मैं थोड़ा बहक गया था! अगर आप नहीं चाहती कि मैं आपके साथ कुछ करूं तो मैं नहीं करूँगा, बस आप यह बात किसी को मत बताना!

तब तक मैं उनको इतना उत्तेजित कर चुका था कि वो चुदे बिना नहीं रह सकती थी पर अपने आप को सम्भालते हुए बोली- कोई बात नहीं, जवानी में ऐसी गलती हो जाती है, तुम फिक्र मत करो, मैं किसी को नहीं बताऊँगी।

मैं उनका इशारा समझ गया था पर मैं उनको उनकी मर्जी से उनको चोदना चाहता था और जानता था कि ये आज नहीं तो कल खुद मुझसे चुदवायेगी।
मैं उस समय उनको उसी आग में छोड़ के वापस आ गया।
मैं मौके का इंतज़ार करने लगा।

फिर एक दिन चाचा की तबीयत थोड़ी ख़राब थी और चाची को किसी कारणवश अपनी बहन के यहाँ जाना था, घर में और लोगों के रहते हुए भी उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनको छोड़ दूं।
मैंने हाँ कर दी।

यह जानते हुए भी कि वो भी अब मुझसे चुदना चाहती है, मैं अपनी तरफ से कोई हड़बड़ी नहीं कर रहा था, उनको ले जाते समय रास्ते में मैंने उनसे कोई बात नहीं की और न ही उन्होंने मुझसे कुछ कहा।

जब सड़क में गड्ढे आ जाते थे तो मेरी ओर सरक जाती थी, तब उनके दूध जब मेरे पिछवाड़े को छूते थे तो मेरा लंड सलामी देने लगता था पर फिर भी मैं अपने आप को कंट्रोल करता था।

उस दिन अच्छे से मैंने उनको वहाँ से वापस ले आया।

कई दिन तक मैंने मुठ मार के काम चलाया पर एक दिन जब मेरा चोदने का बहुत मन करने लगा था और ठीक उसी दिन उन्होंने मुझसे कुछ दवाई मंगवाई।
मैंने सोच लिया कि आज चांस मार लेना चाहिए।

मैंने स्कूल से वापस आते समय उनके दवाई की थैली में कंडोम खरीद कर डाल दिया था और आते ही मैं उन्हें देने गया।
संयोग से जब देने गया तब घर में सिर्फ वही थी।

उस समय भी बिना कुछ कहे मैं वो थैली पकड़ा के वापस आ गया।

फिर जब मुझे लगा की अब तक वो कंडोम को देख चुकी होगी तो घूमने के बहाने उनके घर के पास गया।

वो भी घर से निकली और इशारे से मुझे कुछ बोलना चाह रही थी पर मैं समझ नहीं पाया, मैंने भी इशारे में कह दिया कि थोड़ी देर बाद में आता हूं जब चाचा नहीं रहेंगे।
वो भी हाँ में सर हिला के वापस कमरे में घुस गई।

मैं फिर थोड़ी देर बाद उनके घर गया जब चाचा नहीं थे।
मैंने कहा- क्या बोलना चाह रही थी बोलो?

तो उन्होंने कहा- मेरे उस दिन मना न करने के बावजूद भी तुमने मेरे साथ जबरदस्ती नहीं और बिना कुछ किये मुझे तड़पा के वापस चले गए, यहाँ तक कि आज तक तुमने मेरी कोई भी बात नहीं टाली तो अब मैं भी तुम्हारे लिए कुछ करना चाहती हूं, तुम जो चाहे कर सकते हो मेरे साथ… मैं भी तुम्हारे साथ सोने के लिए बेताब हूं।

इतना बोल के जब उन्होंने सिर झुका लिया तो मैंने उनका हाथ पकड़ के सीधा कहा- कब और कहाँ?
उन्होंने कहा- आज रात 10 बजे घर के पीछे वाले खेत में पेड़ के नीचे मिलना!

मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे और हाँ में सर हिलाते हुए मैं वहाँ से आ गया।
मैं बहुत खुश हो रहा था और रात में 9:30 से ही पेड़ के नीचे उनका इंतज़ार करने लगा।

जैसे ही ठीक 10 बजे, वो आते हुए दिखी मुझे, मेरी धड़कने तेज होने लगी। चाँदनी रात में लाल साड़ी पहने जब वो मेरे पास आ रही थी तो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

एक एक सेकंड मेरे लिए भारी होता जा रहा था, वो हल्के हल्के कदम से मेरे पास आती जा रहीं थी और मैं एकटक उनकी ओर निहार रहा था। जब वो एकदम से मेरे पास में आकर मेरे सामने खड़ी हो गई तो मैंने उनके दाहिने हाथ को अपने हाथ में लेकर चूम लिया, तो उन्होंने शर्म से अपना सर नीचे झुका लिया।

फिर मैंने उनकी चोटी को पकड़ते हुए उनका सर ऊपर उठाया और अपने होंठ उनके होंठों पे रख दिए।
उनकी सांसें गर्म हो चुकी थी।

मैंने अपनी जीभ से उनका मुंह खोला और जीभ के साथ खेलने लगा। मैं उनकी पीठ पे हाथ फेरने लगा धीरे धीरे मेरे हाथ उनके चूतड़ तक पहुँच गए और मैं उन्हें मसलने लगा।
अब मैं उनके होंठों को चूस रहा था, वो भी गर्म हो रही थीं।

लगभग 5 मिनट तक उन्हें अच्छी तरह से चाटने के बाद मैंने उनके चूतड़ों को कसकर पकड़ के अपनी गोदी में उठा लिया।
वो भी मेरी गर्दन को अपनी बाहों में जकड़ के आराम से मेरी गोदी के सहारे लटकी रहीं।

इस अवस्था में ठीक उनकी चूत मेरे लंड के सामने थी और उनके उभार मेरे मुंह के सामने… मैं ब्लाउज के ऊपर से ही उनके उरोजों को चूमने लगा और मेरा लंड तो ऐसे फुंफ़कार रहा था मानो अभी पैंट चीर के उनकी चूत को फाड़ दे।

मैं कपड़े के ऊपर से ही दोनों उभारों को बारी बारी से दांतों से काट रहा था।
फिर धीरे से मैंन उनको जमीन में लेटाया और ब्लाउज के बटन खोलने चालू कर दिए।

जैसे ही मैंने ब्लाउज खोल के उनके बदन से उतारा वो लाल साड़ी पहने हुए काले ब्रा में एकदम परी लग रही थी।
अब उनको थोड़ा ऊपर उठाकर ब्रा के हुक खोलते हुए उनके दूधों को आजाद कर दिया।

चाँदनी रात में खुले आसमान के नीचे उनके सफ़ेद सफ़ेद दूध कहर ढा रहे थे, अब उनके बदन के उपरी हिस्सा पूरी तरह नग्न था।
मैंने खुले उरोजों को मुह में भरकर चूसना चालू किया।

मैंने उनके दोनों थनों को चूस चूस कर लाल कर दिया तो पेटीकोट के अन्दर टटोलने लगा।
आज उन्होंने पेटीकोट के अन्दर और कुछ नहीं पहना था, जैसे ही मैंने उनकी चूत पर हाथ फेरना चालू किया चूत पूरी तरह गीली हो गई, मैं समझ गया कि चाची चुदने को तैयार हैं।

अब मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिए, अब वो पूरी नंगी हो चुकी थीं।
मैंने उनकी चूत में अपनी उंगलियाँ घुसेड़ दी और अन्दर बाहर करने लगा।
वो अब जोर–जोर से आह उफ़ करने लगीं मैं भी उनकी चूत से निकले पानी को चाटने लगा, वो हिलने लगी।

मैं अपने दांतों से उनकी चूत को काट रहा था और हाथों में उभारों को मसल रहा था, बहुत मजा आ रहा था।
बहुत देर तक चूत चाटने के बाद जब उनके सांसें तेज होने लगी तो मैं समझ गया कि अब लोहा पूरा गर्म हो गया है, हथौड़ा मार देना चाहिए।

पर मैं भी उनको मौका देना चाहता था अपने लंड का दीदार करने का, मैंने अपने कपड़े उतारने के बाद अपना लंड उनकी मुंह से सटा दिया।
शुरू में लंड को मुंह से लेने के लिए चाची ने मना किया पर मैंने जबरदस्ती अपने सुपाड़े को उनकी मुंह में घुसा दिया थोड़ी देर शांत रहने के बाद वो बड़े प्यार से उसे चूसने लगी, मैं भी कराहने लगा।

ऐसा लग रहा था कि उसके मुंह में ही ना झड़ जाऊं… पर ऐसा नहीं हुआ।
थोड़ी देर चूसने के बाद उन्होंने मेरा लंड अपने मुंह से आजाद किया।

अब मैं उनकी चूत में पेलने के लिए पूरी तरह तड़प रहा था।
मैंने उनको लेटा दिया और अपने लंड की उनकी चूत की मुख पे टिकाते हुए अपना पोजीशन ले लिया, अब उनके दूधों को अपने हाथ में लेकर निचोड़ते हुए धीरे से अपना लंड उनकी चूत में पूरी तरह घुसा दिया।

वो भी गहरी सांस लेते हुए सिहर गई।
मैं अब धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ने लगा, इतना आनन्द मिल रहा था कि क्या बताऊँ… और वो भी पूरा मजा ले रही थी।

करीब 10 मिनट तक उनकी चूत फाड़ने के बाद मैंने अपना सारा वीर्य उनकी चूत में ही उड़ेल दिया।
वो मंद-मंद मुस्कुरा रही थी।
मैंने उनको खूब चूमा और 10 मिनट बाद जब मेरा लंड फिर सलामी देने लगा तो चुदाई का एक दौर फिर जम कर चला।
इस बार तो मैंने उनकी चूत फाड़ ही दी थी और वो पूरी तरह तृप्त हो चुकी थी।

इस तरह उस रात मैंने उनको दो बार चोदा और उनकी चूत की प्यास बुझाई।
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